आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लक्ष्मी की कहानीः द ओनली लाइफ

द ओनली
                
                                                         
                            अपने अनुयायियों के लिए वह ओशो, आचार्य रजनीश या भगवान हैं। विरोधियों के लिए वह एक विवादास्पद धर्मगुरु हैं, जिन्होंने यौन उन्मुक्तता को बढ़ावा दिया और जिन्हें रॉल्स रॉयस और महंगी घड़ियों में ज्यादा रुचि थी। एक तीसरा वर्ग भी है, जो ओशो का अनुयायी न होते हुए भी उनकी वाग्मिता से प्रभावित रहा है और उन्हें बुद्ध के बाद सबसे बड़ा विचारक मानता है। राशिद मैक्सवेल ने यह किताब ओशो पर नहीं, उनकी शुरुआती अनुयायी और पहली पर्सनल सेक्रेटरी लक्ष्मी कुरुवा पर लिखी है। अलबत्ता इस बहाने ओशो पर भी कमोबेश रोशनी पड़ती है।
                                                                 
                            

लक्ष्मी मुंबई की एक जैन परिवार की लड़की थी, जो बचपन से ही आध्यात्मिक रुझान की, लेकिन विद्रोही स्वभाव की थी। अपने परिवार की परंपरा के विपरीत उसने को-एजुकेशन वाले स्कूल में पढ़ाई की और विवाह भी नहीं किया। महात्मा गांधी से प्रभावित लक्ष्मी ऑल इंडिया वुमेन कांग्रेस से जुड़ीं। वहीं चौंतीस की उम्र में इस छोटे कद, लेकिन मजबूत इरादों वाली महिला की पहली बार रजनीश से मुलाकात हुई। कांग्रेस पार्टी की सिल्वर जुबली कॉन्फ्रेंस में, जिसकी वह सचिव थीं, रजनीश अतिथि वक्ता थे। आगे पढ़ें

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर