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नेपाल में भीषण बाढ़ त्रासदी से करीब 500 लोगों की मौत, विदेशी बचाव दलों को मंजूरी नहीं दी

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sat, 29 Aug 2026 03:10 AM IST

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में 500 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है, जबकि कई विदेशी नागरिकों समेत बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालात बेहद गंभीर होने के बावजूद नेपाल सरकार ने फिलहाल दूसरे देशों से मिलने वाली खोज और बचाव टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।

बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। चीन की सीमा से लगे रसुवा जिले में हालात सबसे ज्यादा भयावह बताए जा रहे हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने कई कस्बों और बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। बाढ़ और मलबे के कारण सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है, जिससे राहत और बचाव अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने शुक्रवार को कहा कि फिलहाल नेपाल को विदेशी खोज और बचाव टीमों की जरूरत नहीं है। उन्होंने माना कि अलग-अलग देशों की ओर से मदद की पेशकश की जा रही है और ऐसी स्थिति में दूसरे देशों का सहयोग की पेशकश करना स्वाभाविक है। लेकिन नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल खुद ही खोज और बचाव अभियान चला रही हैं और स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं।

इस बीच कई देशों ने नेपाल की मदद के लिए अपनी रेस्क्यू टीम भेजने की इच्छा जताई है। द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने नेपाल सरकार से अपने खोज एवं बचाव दल भेजने की अनुमति मांगी है। खास बात यह है कि इन देशों के नागरिक भी बाढ़ की चपेट में आए हैं और कई विदेशी नागरिकों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

दक्षिण कोरिया ने संकेत दिया है कि वह नेपाल के साथ अपनी रेस्क्यू टीम भेजने को लेकर बातचीत जारी रखेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल सरकार अपने रुख में बदलाव करती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना और बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में जरूरी सेवाओं को बहाल करना है। लगातार खराब हालात और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव अभियान बेहद मुश्किल बना हुआ है। इस आपदा के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत कार्य चल रहे हैं, जबकि प्रभावित परिवार अपनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
 

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