दिल्ली में BRICS का मंच और दुनिया की नजरें मोदी-पुतिन मुलाकात पर। 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक से पहले क्रेमलिन ने भारत को रूस का रणनीतिक साझेदार बताया है। पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। बातचीत में तेल और रक्षा से लेकर परमाणु ऊर्जा, राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार, रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस के अत्याधुनिक SU-57 लड़ाकू विमानों तक कई मुद्दे सामने आए हैं। यानी दिल्ली में सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था पर भी बड़ा मंथन देखने को मिल सकता है।
दिल्ली तैयार है, BRICS का मंच तैयार है और अब इंतजार है मोदी-पुतिन मुलाकात का।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। क्रेमलिन ने इसकी पुष्टि करते हुए भारत को रूस का 'रणनीतिक साझेदार' बताया है।
पुतिन के भारत पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
पेस्कोव के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच संबंध बेहद करीबी और व्यावहारिक हैं। दोनों नेता वैश्विक एजेंडे और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत कर सकते हैं।
यानी दिल्ली में होने वाली मुलाकात का एजेंडा काफी व्यापक रहने वाला है।
BRICS को लेकर पेस्कोव ने कहा कि यह कोई पारंपरिक संगठन नहीं बल्कि एक 'क्लब' है। इसमें कोई चार्टर, स्थायी नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है। इसके बावजूद सदस्य देश वैश्विक व्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को लेकर साझा सोच रखते हैं।
रूस BRICS के तीन प्रमुख स्तंभों- राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, तथा सांस्कृतिक एवं मानवीय संपर्क को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
पेस्कोव ने BRICS पार्टनर कंट्री के विस्तार को भी सकारात्मक बताया। बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है।
भारत के रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित कार्रवाई पर भी पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रस्तावित अमेरिकी कदम को 'अवैध और अस्वीकार्य' बताया।
साथ ही पेस्कोव ने कहा कि रूस और BRICS देशों के बीच करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।
यानी रुपया-रूबल और दूसरी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच BRICS के मंच पर डॉलर के विकल्प की चर्चा भी अहम हो गई है।
भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ तेल और रक्षा तक सीमित नहीं हैं।
पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई है। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
इसके अलावा रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी पेस्कोव ने स्वागत किया।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे की है, वह है रूस का अत्याधुनिक SU-57 लड़ाकू विमान।
क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि भारत को SU-57 की संभावित बिक्री का मुद्दा दोनों देशों की बातचीत के एजेंडे में शामिल है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता के दौरान रक्षा सहयोग पर कोई बड़ा संकेत सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मोदी-पुतिन मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध अभी भी वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
भारत लगातार युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है। भारत की शांति पहल को लेकर सवाल पूछे जाने पर पेस्कोव ने कहा कि रूस भारतीय प्रयासों का स्वागत करता है।
यानी दिल्ली में मोदी-पुतिन की मुलाकात के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशों पर भी बातचीत संभव है।
BRICS को पेस्कोव ने सिर्फ आर्थिक समूह मानने से इनकार किया और इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
उनका कहना है कि एकध्रुवीय दुनिया अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है और दुनिया नई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
यही वजह है कि दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं माना जा रहा।
एक तरफ मोदी-पुतिन की रणनीतिक साझेदारी, दूसरी तरफ अमेरिका के प्रतिबंधों का दबाव. BRICS में बढ़ता सहयोग और तीसरी तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध।
इन सबके बीच दिल्ली में होने वाली मोदी-पुतिन मुलाकात सिर्फ दो देशों के रिश्तों की तस्वीर नहीं दिखाएगी...
बल्कि यह भी बताएगी कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और रूस अपनी रणनीतिक साझेदारी को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।