गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र में शुक्रवार को देश और विदेश से कई प्रतिष्ठित अतिथि मौजूद रहे। इस दौरान पैनल चर्चा में आईं लेखिका नीरजा माधव ने कहा कि बनारस और गाजीपुर मुखौटे वाले शहर नहीं हैं। जो जैसा है वैसा ही खुद को प्रस्तुत करता है। हर शहर का अपना स्वभाव होता है। मुंबई में माया हावी है। बनारस में अक्खड़ मिलेंगे। हम किसी को कुछ नहीं मानते। घाट पर गमछा पहने भोजपुरी बोलने वाला व्यक्ति गुमटी वाला है या खरबपति ये नहीं बता सकते।