श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों का आर्शीवाद लेने के लिए सुम्मेरा तालाब, गोविंद सागर बांध की तलहटी स्थित कुंड सहित ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब व पोखरों पर पर विधि विधान और मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों ने पूर्वजों को जल तर्पण कराया। इसके अलावा घरों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रात:काल से ही लोग तालाब, कुंड एवं मानसरोवरों में स्नानादि करने के बाद हाथ में जल, कुश, अक्षत, तिल आदि लेकर पितरों को वैदिक मंत्रों के साथ जल अर्पित किया। यहां पंडित पुरोहित उन्हे मंत्रों के साथ हाथ जोड़कर पितरों का ध्यान करते हुए उन्हें आमंत्रित करते हुए जल ग्रहण करने की प्रार्थना की । मान्यता है कि तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसलिए श्राद्ध के दिनों में तिथियों के हिसाब से लोग दान पुण्य भी कर रहे हैं। इसके अलावा पूर्वजों का मनपसंद भोजन पकवाकर उनको भोग लगाया जा रहा है। विद्वानों के मुताबिक तर्पण और भोग प्रसाद से पूर्वज अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।