चारों तरफ पानी है लेकिन प्यास बुझाने के लिए पेयजल नहीं। मकड़ीखेड़ा और आसपास की बस्तियों में छह दिन से यही दर्द लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना हुआ है। इन क्षेत्रों में हुआ जलभराव बुधवार को करीब एक इंच घटा, लेकिन कई गलियों में अब भी दो फीट तक पानी भरा है। मुख्य मार्ग खाली होने से थोड़ी राहत जरूर मिली मगर घरों तक पहुंचना अब भी मुश्किल है। मकड़ीखेड़ा, सरस्वती विहार, गुप्ता सोसाइटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, अग्निहोत्रीनगर, सुख्खूपुरवा और ख्योरा में लोग गंदे पानी से होकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए निकल रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक जलभराव के कारण बोरिंग से दूषित और बदबूदार पानी आ रहा है। करीब 25 हजार की आबादी के लिए दिन में भेजे जा रहे पांच टैंकर नाकाफी साबित हो रहे हैं। परमियानाला ओवरफ्लो होने से मैनावती मार्ग और एनआरआई सिटी के मुख्य मार्ग तक पानी पहुंच गया है। ज्योरा और ख्योरा के लोगों को भी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी रामविलास, रोहित, सौरभ आदि ने नगर निगम के आठ में से छह पंप चलने का आरोप लगाया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि सभी आठ पंप लगातार चल रहे हैं। पानी के बीच फंसी जिंदगी अब बस साफ पानी और राहत का इंतजार कर रही है।