राह चलते किसी को आपात परिस्थिति में मदद उपलब्ध कराने के लिए शहर में पौने दो करोड़ रुपये की लागत से 12 प्रमुख जगहों पर पैनिक बटन लगाए गए हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यह सुविधा दी गई है लेकिन देखरेख न होने से किसी का बटन खराब हो गया तो कोई बैनर-पोस्टर के पीछे छिप गया। कई जगह बटन सड़क से दिखता ही नहीं। ऐसे में मुसीबत में फंसे आदमी के लिए इसे तलाशना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। राहगीरों के साथ कोई घटना-दुर्घटना, समस्या होने पर आसानी से मदद उपलब्ध कराने के लिए यह पैनिक बटन लगाए गए हैं। इनमें किसी भी बटन को दबाते ही इमरजेंसी कॉल नगर निगम में बने कंट्रोल रूम में पहुंच जाती है। वहां से मदद उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेटर की आवाज आने लगती है। ये सेवा 24 घंटे काम करती है। इसके लिए कंट्रोल रूम में अलग से ऑपरेटर तैनात हैं लेकिन इन पैनिक बटन की देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है।