स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं मठरी, मोमबत्ती और सब्जी मसाले बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे परिवार का सहारा बन दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। गोंडा में बृहस्पतिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सरस मेले में उनके उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हैं। करनैलगंज की नंदिनी गोस्वामी पीहू स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। वह सब्जी मसाले बेचकर हर माह 15 से 20 हजार रुपये कमाती हैं। इटियाथोक की सरोज ने पति की मौत के बाद मोमबत्ती बनाना शुरू किया। अब वह इसी कमाई से बच्चों की परवरिश और घर का खर्च चला रही हैं। शाहजोत की चांदनी राजपूत मठरी और मिट्टी के दीये बनाकर परिवार की आमदनी बढ़ा रही हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार जेएन राव ने बताया कि मेले का उद्देश्य इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है।