एटा में आशा एवं आशा संगिनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बुधवार को 11 सूत्रीय मांगों को कलेक्ट्रेट धरना स्थल पर प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम को ज्ञापन सौंपा। सामाजिक संगठन आपकी आवाज के बैनर तले ज्ञापन में आशा कार्यकर्ता को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने समेत कई मांगें उठाई गईं। उन्होंने कि स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और मानदेय नहीं मिल रहा है। अध्यक्ष पुष्पा देवी ने मांग की कि आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। मंडल अध्यक्ष सुषमा चतुर्वेदी ने कहा कि जब तक यह दर्जा नहीं मिलता, तब तक नियुक्ति की तिथि से न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। इसके अलावा यात्रा भत्ता देने, आकस्मिक मृत्यु पर 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, सभी कार्यकर्ताओं के आयुष्मान कार्ड बनवाने और मृत्यु के बाद परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की गई। कार्यकर्ता ने आशा संगिनी का ड्यूटी समय निर्धारित करने, 24 दिन के स्थान पर 30 दिन का विजिट कराने व पीएमवाई का कार्य वापस दिए जाने की मांग भी रखी। प्रत्येक प्रसव पर एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि और सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष निर्धारित करने की मांग ज्ञापन में शामिल है। कहा कि आयुष्मान कार्ड, संचारी एवं गैर संचारी रोग, कुष्ठ रोग और आभा कार्ड समेत स्वास्थ्य विभाग की कई योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने में आशा कार्यकर्तांओं की अहम भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। मांगें पूरी न होने पर कार्य बहिष्कार जारी रखने की चेतावनी दी गई। प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा देवी और मंडल अध्यक्ष सुषमा चतुर्वेदी के नेतृत्व में सौंपा गया। राजवती, गुड्डो देवी, मीना कुमारी, शीला देवी, आशा देवी, प्रेमलता, सुनीता, पुष्पा, राधा, पूनम, नारायण श्री समेत सैकड़ों आशा कार्यकर्ता मौजूद रही।