अयोध्या के तमसा तट स्थित रामचौरा गौराघाट का करीब चार दशक बाद कायाकल्प हुआ है। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम के प्रथम रात्रि विश्राम से जुड़ी इस तपोभूमि पर पर्यटन विभाग ने करीब 2.28 करोड़ रुपये से मंदिर और परिसर का सुंदरीकरण कराया है। गर्भगृह में मकराना के सफेद संगमरमर से बनी राम-सीता की साढ़े तीन फीट ऊंची युगल प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी हैं। अब प्राण प्रतिष्ठा के शुभ मुहूर्त का इंतजार है। निर्माण एजेंसी के मुताबिक, बाउंड्रीवॉल की रंगाई और मुख्य द्वार पर लाल पत्थर की फिनिशिंग का काम शेष है। इसे एक सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य है। दीपोत्सव पर यहां भव्य दीपदान की भी तैयारी है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी स्वयं कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मान्यता है कि वनवास के लिए अयोध्या से निकलने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने तमसा नदी के किनारे वटवृक्ष के नीचे पहली रात बिताई थी। उनके पीछे अयोध्यावासी भी यहां तक आए थे। मान्यता के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में श्रीराम सभी को सोता छोड़कर आगे निकल गए, ताकि उनके जाने का पता न चल सके। वर्ष 1985 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के कार्यकाल में मंत्री सीताराम निषाद ने यहां शेड और यात्री सुविधाएं विकसित कराई थीं। इनके जर्जर होने के बाद गयासपुर के प्रधान प्रतिनिधि रामभारत यादव की मांग और समाचार प्रकाशन के बाद जीर्णोद्धार शुरू हुआ। पहले चरण में 1.19 करोड़ और दूसरे चरण में 1.09 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मंदिर को खुले स्वरूप में बनाया गया है, ताकि हाईवे से गुजरने वाले श्रद्धालु भी दर्शन कर सकें। हालांकि, पूर्व प्रधान प्रतिनिधि ब्रह्मादीन निषाद ने सुरक्षा और आवारा पशुओं से बचाव के लिए मंदिर में गेट लगाने की जरूरत बताई है।