अयोध्या के तारुन में रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। बालापुर गांव के एक किसान ने एक एकड़ खेत को प्राकृतिक वाटिका के रूप में विकसित किया है। यहां पांच किस्म की हल्दी के साथ अमरूद, आम, जामुन, बेर, नींबू और पपीता के पौधे लहलहा रहे हैं। ज्वार और बाजरे की सहफसली खेती भी की जा रही है। किसान ने अपने खेत का नाम श्यामा देवी प्राकृतिक फार्म रखा है। यहां काली हल्दी, एलाडाउन, पीतांबर, नरेंद्र वन और नरेंद्र-2 किस्म की हल्दी उगाई जा रही है। करीब आधा एकड़ क्षेत्र में श्रीअन्न के तहत ज्वार-बाजरे की खेती की गई है। किसान का दावा है कि पूरे फार्म में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद तैयार करने के लिए वह अपना बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर भी संचालित करते हैं। इस समय फार्म से प्रतिदिन 50 किलो से अधिक अमरूद की पैदावार हो रही है, जिसे मंडी में बेचा जा रहा है। खेती में किसान की पत्नी श्यामा देवी भी बराबर की भागीदारी निभाती हैं। वह मजदूरों के साथ अमरूद की तुड़ाई और खेत की देखभाल कराती हैं। प्राकृतिक खेती के इस मॉडल के लिए किसान को पिछले वर्ष केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सम्मानित कर चुके हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज से भी उन्हें कई बार सम्मान मिल चुका है। उपकृषि निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार कनौजिया ने बताया कि किसान प्राकृतिक खेती के साथ पांच प्रकार की हल्दी, श्रीअन्न और फलदार पौधों की सहफसली खेती कर रहे हैं। उनका मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। किसान का कहना है कि उनका उद्देश्य खुद शुद्ध भोजन करना और दूसरों को भी शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है।