किसान परिवार से निकलकर राजनीति में पहचान बनाने वाले पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह मंगलवार को अयोध्या में साकेत महाविद्यालय में अपने पुराने दिनों को याद कर भावुक हो गए। अपने गुरु प्रो. सत्येंद्र त्रिपाठी को सम्मानित करने के बाद उनके पैर छुए तो आंखों से आंसू छलक पड़े। इससे पहले अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनके जीवन को दिशा देने और सफलता तक पहुंचाने में साकेत महाविद्यालय व यहां के गुरुजनों का 25 प्रतिशत योगदान है। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) की ओर से साकेत महाविद्यालय के जेपीएन सिंह सभागार में आयोजित सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह में उन्होंने महाविद्यालय से जुड़े संस्मरण साझा किए। कहा कि यहां की यादें इतनी रोचक हैं कि उन पर लंबी सीरीज बनाई जा सकती है। बृजभूषण ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं और साकेत महाविद्यालय से जुड़ने से पहले गाय-भैंस चराते थे। वर्ष 1991 में अपने पहले चुनाव के दौरान अयोध्या और साकेत के कार्यकर्ताओं से मिले सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, प्रो. रामपति तिवारी, डॉ. जन्मेजय तिवारी, प्रो. अमर कुमार सिंह और प्रो. आशुतोष प्रताप सिंह सहित अन्य गुरुजनों को याद किया। महंत रामदास जी, प्रो. दानपति तिवारी, प्रो. अमूल्य कुमार सिंह, प्रो. आशीष प्रताप सिंह और डॉ. संतलाल सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।