अयोध्या में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे के बीच राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय मंगल बाजार रूदौली में कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक डॉक्टर, दो स्टाफ नर्स और एक स्वीपर के सहारे व्यवस्था संचालित हो रही है। फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय के पद खाली होने से मरीजों को दवा देने की जिम्मेदारी भी डॉक्टर को संभालनी पड़ रही है। वहीं करीब 25 वर्षों से अस्पताल किराये के भवन में संचालित हो रहा है। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने सुबह करीब 9:45 बजे अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार मरीजों को देख रहे थे। स्टाफ नर्स रजनी गुप्ता भी मौजूद थीं। उपचार के लिए पहुंचे सरैठा निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उन्हें आयुर्वेदिक उपचार से लाभ मिलता है और वह इलाज के लिए अस्पताल आते हैं। अस्पताल में फार्मासिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं। इनमें एक फार्मासिस्ट का स्थानांतरण हो चुका है, जबकि दूसरा पद रिक्त है। फार्मासिस्ट की कमी के कारण चिकित्साधिकारी को ही मरीजों को दवा वितरित करनी पड़ रही है। इससे डॉक्टर पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। वार्ड ब्वॉय के दो पद स्वीकृत हैं। इनमें एक कर्मचारी का स्थानांतरण अंबेडकरनगर हो चुका है, जबकि दूसरा पद रिक्त है। इससे मरीजों की देखरेख और अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं में भी कर्मचारियों की कमी महसूस हो रही है। अस्पताल में चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं। इनमें डॉ. सुरेश कुमार तैनात हैं, जबकि डॉ. गिरिजेश्वर उपाध्याय को अयोध्या के गायत्री भवन से संबद्ध किया गया है। तीन स्टाफ नर्स के पदों में संतोष कुमारी को आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज मझनपुर, मवई से संबद्ध किया गया है। मंगलवार को ज्योति मिश्रा अवकाश पर थीं, जबकि एक पद रिक्त है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल के संचालन में दिक्कत होती है। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों की तैनाती होने से अस्पताल की व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से संचालित हो सकेंगी। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय करीब 25 वर्षों से किराये के भवन में संचालित हो रहा है। लंबे समय से अस्पताल के लिए स्थायी भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। कर्मचारियों की कमी के साथ किराये के भवन में अस्पताल का संचालन भी स्वास्थ्य सेवाओं के सामने चुनौती बना हुआ है।