बाह। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितृपक्ष को केवल तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। बटेश्वर मंदिर के पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी ने बताया, मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण पिंडदान श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। और उनका आशीर्वाद परिवार पर सदा बना हुआ रहता है। पितृपक्ष के पहले दिन शनिवार को बृह्मलाल महाराज का आकर्षक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूजा के दर्शन एवं अपने पितृरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने के लिए शनिवार सुबह से ही बटेश्वर में लोगों की भारी भीड़ रही।