राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टीरियल रोग संस्थान में ड्रग रेजिस्टेंट के मरीजों की जिनोम सीक्वेंसिंग कर इलाज किया जा रहा है। इससे मर्ज पर दवाओं का असर हो रहा है। सबसे ज्यादा मरीज फिरोजाबाद, टूंडला समेत सात शहरों से आ रहे हैं। दवा का कोर्स पूरा करने के बाद ये ठीक हो रहे हैं। कुष्ठ दिवस पर शुक्रवार को संस्थान में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ये बातें वैज्ञानिकों ने कहीं। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया कि संस्थान में 8,750 कुष्ठ रोगी पंजीकृत हैं। इनमें बीते साल कुष्ठ के 1,436 नए मरीज आए हैं। प्रदेश में 10 हजार लोगों में से एक में ये बीमारी मिल रही है। इनमें से फिरोजाबाद, टूंडला, कानपुर के घाटमपुर, बरेली, बदायूं, मुरादाबाद, लखीमपुर खीरी से अधिक मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र में प्रति 10 हजार की आबादी में मरीजों की संख्या एक से ज्यादा है। वैज्ञानिक डॉ. राजकमल ने बताया कि दवाएं बीच में छोड़ने से मरीज ड्रग रेजिस्टेंट हो रहे हैं। इससे दवाएं बेअसर होने लगती हैं। ऐसे में इनकी जिनोम सीक्वेंसिंग कर उन दवाओं को चिह्नित कर इलाज किया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. डीएस चौहान ने बताया कि सुन्नपन, त्वचा का मोटा होना, नसों में सूजन, हाथ-पैरों में संवेदना की कमी होना कुष्ठ के लक्षण हैं। उपचार से ये पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। संस्थान में जांच और इलाज की नई और आधुनिक मशीनें हैं। कुष्ठ की जल्दी जांच करने के लिए आधुनिक किट और ईयरलोब माइक्रोस्कोप स्लिट तकनीक भी इस्तेमाल हो रही है। कार्यक्रम में डॉ. ममता अरोड़ा, डॉ. भावना शर्मा, डॉ. अवि बंसल आदि ने भी व्याख्यान दिए।