शिमला शहर में शुक्रवार को बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें दो अलग-अलग आपदा परिदृश्यों का अभ्यास किया गया। पोर्टमोर स्कूल को भूकंप प्रभावित क्षेत्र और विकासनगर को अग्निकांड से जूझता इलाका मानते हुए आपातकालीन तैयारियों का परीक्षण किया गया। पोर्टमोर स्कूल में भूकंप की स्थिति दर्शाते हुए छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत व बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया और घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार दिया गया। वहीं, विकासनगर को आग की चपेट में आया क्षेत्र मानते हुए फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य सेवाएं और पुलिस ने तालमेल के साथ अग्निशमन अभियान चलाया। इस दौरान कई घायलों को मौके से सुरक्षित निकाला गया और प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया। मरीजों को स्ट्रेचर और एंबुलेंस की सहायता से निकाला गया, जिससे आपदा स्थिति में मेडिकल टीम की तत्परता का परीक्षण हुआ। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) की नई ओपीडी की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अमन मड़ैक ने बताया कि अस्पताल हर आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की टीम प्रशिक्षित है और इस तरह के अभ्यासों से उनकी क्षमता और अनुभव में और इजाफा होता है। डॉ. अमन मड़ैक ने यह भी स्पष्ट किया कि आईजीएमसी में 100 बेड उपलब्ध हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर इस क्षमता तो कई गुना बढ़ाया जा सकता है । आवश्यक संसाधन, दवाइयां, डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ हर समय तैयार रहते हैं, ताकि किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।