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मध्य प्रदेश: विदिशा में इंजेक्शन से नशा करने वाले 11 युवकों में एचआईवी की पुष्टि, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

Wed, 28 Oct 2026 08:24 PM IST
विदिशा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा

नशे की लत अब युवाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले 11 युवकों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ये मामले सामने आए हैं। संक्रमण की पुष्टि के बाद सभी संबंधित युवकों का उपचार शुरू कर दिया गया है। वहीं, नशे के जोखिम में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें जांच, उपचार और परामर्श सेवाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की चिंता का प्रमुख कारण इंजेक्शन और सिरिंज को साझा करने से संक्रमण फैलने की आशंका है।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल जनवरी से सितंबर तक इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वाले 11 युवकों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन मामलों के सामने आने के बाद विभाग जोखिम वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और उन्हें संक्रमण के प्रति जागरूक करने पर जोर दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण की पहचान होने के बाद समय पर उपचार शुरू करना महत्वपूर्ण है। संक्रमित लोगों को नियमित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे निर्धारित उपचार जारी रख सकें और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रख सकें।

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परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, विदिशा जिले में इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले करीब 300 लोग पंजीकृत हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती के साथ-साथ जोखिम वाले लोगों तक पहुंचने का अवसर भी है। विभाग का प्रयास है कि ऐसे लोगों को संक्रमण की जांच, सुरक्षित व्यवहार और नशे से बाहर निकलने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। नशे के दौरान यदि एक ही सुई या सिरिंज का इस्तेमाल कई लोग करते हैं, तो एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क से दूसरे व्यक्ति में भी संक्रमण फैल सकता है। इसलिए इस्तेमाल की गई सिरिंज को साझा करना गंभीर जोखिम पैदा करता है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने, सिरिंज साझा नहीं करने और जरूरत पड़ने पर एचआईवी की जांच कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य केवल संक्रमण की पहचान करना ही नहीं, बल्कि जोखिम वाले लोगों को समय रहते चिकित्सा सेवाओं से जोड़ना भी है। क्षय रोग अधिकारी समीर किरार के विभागीय प्रयासों के तहत इस विषय पर जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किरार के अनुसार एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता। समय पर जांच, नियमित एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) और चिकित्सकीय निगरानी से संक्रमण को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। उपचार में नियमितता बनाए रखना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।

एचआईवी सामान्य मेलजोल, साथ बैठने, हाथ मिलाने या भोजन साझा करने से नहीं फैलता। इससे जुड़ी गलत धारणाएं संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव बढ़ा सकती हैं। इसलिए जागरूकता के साथ संवेदनशील व्यवहार भी जरूरी है।

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