दमोह जिले में निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा नहीं करने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वर्ष 2025 में जिन विद्यालय भवनों का निर्माण पूरा हो जाना था, वे वर्ष 2026 में भी अधूरे हैं।
निर्माण में देरी के साथ गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन ने अब निर्माण सामग्री और किए गए कार्य की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत निर्माण स्थलों से सैंपल लेकर टेस्टिंग कराई जाएगी। जांच में निर्धारित मानकों के विपरीत निर्माण या सामग्री पाए जाने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हटा के सांदीपनि विद्यालय में कलेक्टर ने खुद खोदा था प्लास्टर
सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विगत दिनों कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने हटा क्षेत्र में निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालय का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आने पर कलेक्टर ने मौके पर स्वयं हथौड़े से दीवार का प्लास्टर खोदकर निर्माण की स्थिति देखी। इसके बाद मौके पर मौजूद इंजीनियरों को निर्माण सामग्री की जांच करने और रेत के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए।
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गुणवत्ता में कमी मिलने पर कंपनी के अधिकारियों को लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं मिलने पर कलेक्टर ने संबंधित कंपनी के अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने और निर्धारित मानकों के अनुसार काम कराने के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया था कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा होना चाहिए। इसके बाद अब निर्माण में देरी को लेकर ठेकेदार पर भारी जुर्माने की कार्रवाई की गई है।
2025 की समयसीमा बीती, 2026 में भी निर्माण अधूरा
सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इन भवनों का निर्माण निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाना था, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के अनुसार वर्ष 2025 में जिन सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण पूर्ण होना अपेक्षित था, वे वर्ष 2026 में भी निर्माणाधीन हैं। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये के जुर्माने की कार्रवाई की है।
सिर्फ जुर्माना नहीं, निर्माण की गुणवत्ता की भी होगी जांच
प्रशासन की कार्रवाई केवल समय पर काम पूरा नहीं करने तक सीमित नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों के बाद अब तकनीकी जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण स्थलों से आवश्यक सैंपल लिए जाएं और उन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाए। टेस्टिंग रिपोर्ट के आधार पर यह पता चलेगा कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और किया गया कार्य निर्धारित तकनीकी एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।
सैंपल रिपोर्ट से खुलेगी निर्माण की गुणवत्ता की स्थिति
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए तकनीकी परीक्षण महत्वपूर्ण है। इसी वजह से प्रशासन ने रेत समेत निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री के सैंपल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच रिपोर्ट में निर्धारित मानकों से विचलन या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे निर्माण एजेंसी के साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।
विद्यार्थियों को समय पर मिलना था बेहतर शैक्षणिक माहौल
सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर भवन, शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा के बाद भी भवनों का निर्माण पूरा नहीं होने से इन सुविधाओं का लाभ विद्यार्थियों को समय पर नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन का जोर अब लंबित निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर है कि भवनों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
3.68 करोड़ के जुर्माने के बाद बढ़ी निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी
ठेकेदार पर लगाए गए 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये के जुर्माने की कार्रवाई से प्रशासन ने निर्माण कार्यों में समयसीमा और जवाबदेही को लेकर सख्त रुख का संकेत दिया है। अब प्रशासन की निगाह निर्माण कार्य की प्रगति और सैंपल टेस्टिंग की रिपोर्ट पर रहेगी। जांच में यदि गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट और अधूरे निर्माण पर रहेगी नजर
फिलहाल सांदीपनि विद्यालयों के मामले में दो प्रमुख बिंदु प्रशासन की निगरानी में हैं। पहला, निर्धारित समयसीमा के बाद भी अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को जल्द पूरा कराना और दूसरा, निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराना। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निरीक्षण के दौरान सामने आई गुणवत्ता संबंधी स्थिति, मौके पर कराई गई सैंपलिंग और अब ठेकेदार पर लगाए गए भारी जुर्माने के बाद इस परियोजना को लेकर प्रशासनिक निगरानी और सख्त होने के संकेत हैं। आने वाले समय में टेस्टिंग रिपोर्ट और निर्माण की प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि विद्यालय भवनों का काम निर्धारित मानकों के अनुसार कब तक पूरा हो पाता है।