होटल ताज में 18वें ब्रिक्स एकेडमिक फोरम में मीडिया राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में वैश्विक उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में समीर शरण ने कहा कि भारत को अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पहली पसंद (फर्स्ट चॉइस) बनने की दिशा में काम करना चाहिए। अमेरिका और कनाडा की तुलना में अब छात्र जर्मनी जैसे देशों का रुख कर रहे हैं, जहां अकेले 32% युवा छात्रों ने आवेदन किया है। ऐसे में भारत को भी ब्रिक्स देशों, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के छात्रों के लिए प्राथमिकता बनना होगा। वहीं अमित कुशवाहा ने लखनऊ विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 188 विदेशी छात्रों ने प्रवेश लिया है और शीर्ष विश्वविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा करते हुए 25 ब्रिक्स छात्रों को इस सम्मेलन का हिस्सा बनाया गया है। लखनऊ जैसे उभरते शहर वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के लिए विकास और शिक्षा का बेहतरीन मॉडल पेश कर सकते हैं।