कुटलैहड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा का अनूठा संगम गुरुवार गोबिंद सागर झील के विभिन्न घाटों पर देखने को मिला, जब श्रद्धालुओं ने लठियानी, कोलका और धवेडा घाटों पर विधिवत रूप से बेड़े छोड़कर अपने ईष्ट को जल समर्पित किया। ढोल-नगाड़ों की मधुर धुन, भक्तिमय भजन और जयकारों के बीच जब श्रद्धालुओं ने बेड़े जल में प्रवाहित किए। स्थानीय ग्रामीणों सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। इस अवसर पर ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि इन धार्मिक स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं जैसे घाटों की साफ-सफाई, सुरक्षा के लिए रस्सियों की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और प्राथमिक चिकित्सामुहैया करवाई जाएं ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के आस्था की अभिव्यक्ति कर सकें। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और पीढ़ी दर पीढ़ी इसकी महत्ता बनी हुई है।