ग्राम पंचायत लडोली के अंतर्गत पंजोआ खुर्द में सरकारी जमीन की निशानदेही को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में स्थानीय ग्रामीण पंचायत प्रधान के नेतृत्व में एकजुट हो गए हैं। बुधवार को ग्रामीणों ने पंजोआ बाजार में रोष रैली निकालकर नारेबाजी की और संबंधित जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर विवाद का स्थायी समाधान निकालने की गुहार लगाई। पंचायत प्रधान शशि कुमारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रास्ते की निशानदेही आम जनता की सुविधा और जनहित के विकास कार्यों के लिए जरूरी है। उन्होंने 17 अक्तूबर को प्रशासन की ओर से की गई पैमाइश को वैध बताते हुए कहा कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में बाधा नहीं आनी चाहिए। प्रधान ने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि खसरा नंबर 626, 627, 792/625 और 784/624 राज्य सरकार के अधीन लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज हैं। उनके अनुसार, इनमें खसरा नंबर 626 और 627 पुराने समय से गैर-मुमकिन सड़क की श्रेणी में दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि निशानदेही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मामले को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर समाधान निकाला जाना चाहिए। शशि कुमारी ने बताया कि प्रस्तावित सड़क के दायरे में स्थानीय निवासी प्रकाश चंद की निजी जमीन का कुछ हिस्सा भी आ रहा था। उनके अनुसार, प्रकाश चंद ने जनहित को ध्यान में रखते हुए यह हिस्सा दानपत्र के माध्यम से लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया है। प्रधान ने कहा कि पंजोआ की सीमा से सटी करीब 33 कनाल 2 मरले सरकारी जमीन और जल शक्ति विभाग की पेयजल परियोजना तक इस रास्ते का सीधा जुड़ाव होना है। रास्ते का निर्माण होने से पंजोआ के अलावा ठठल और चक्क गांव के लोगों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। पंचायत प्रधान ने कहा कि पुराने विवादों के आधार पर मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को निशानदेही या जमीन से संबंधित कोई आपत्ति है तो वह अपने दस्तावेजों के साथ प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर मामले का उचित समाधान निकाला जाए, ताकि रास्ते से जुड़ी समस्या दूर हो सके।