भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के पानवी गांव में तीन दिवसीय फूलयाच पर्व मनाया जा रहा है। फूलों के इस त्योहार में ग्रामीण प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ अपने पूर्वजों को भी याद करते हैं। इस पर्व में ऊंचे पहाड़ों से जंगली फूल एकत्र करने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। ग्रामीणों का एक विशेष दल पहाड़ों की ऊंचाइयों से लादरा नामक सुगंधित जंगली फूल लेकर गांव लौटा है। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ दल का स्वागत किया गया। पर्व के दौरान स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जा रही है। देव प्रतिमाओं को फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उत्सव में महिला और पुरुष पारंपरिक किन्नौरी वेशभूषा में शामिल हुए। उन्होंने मंदिर परिसर और गांव के सार्वजनिक स्थलों पर लोकगीतों की धुनों पर कंग और नाटी जैसे सामूहिक लोकनृत्य किए। एक-दूसरे का हाथ थामकर गोल घेरे में नृत्य करने की परंपरा ग्रामीण एकता और सामूहिक सहभागिता को दर्शाती है।