जिले की अनाज मंडियों में धान की भारी आवक के बीच खरीद और उठान का संकट गहरा गया है। मंडियों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। अब तक मंडियों में लगभग 2.50 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से केवल एक लाख एमटी की खरीद ही हो पाई है। सबसे बदतर स्थिति उठान की है, जहाँ महज 25 हजार एमटी धान ही गोदामों तक पहुँचाया जा सका है। किसान कर्मबीर ग्योंग कृष्ण दयोरा ने आरोप लगाया कि पिछले तीन-चार दिनों से खुले आसमान के नीचे मंडियों में डेरा डाले हुए हैं। मंडियों में पीआर धान की सरकारी खरीद सुचारू रूप से नहीं की जा रही है। बार-बार मिलर्स और प्रशासन के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर धीमी रफ्तार ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है।