पहाड़ों में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीवन भी हर कदम पर चुनौती भरा है। ऐसा ही एक मामला सुनाह गांव में सामने आया, जहां चरते समय पैर फिसलने से एक गाय करीब 100 फुट गहरी खाई में जा गिरी। गाय को खाई में फंसा देख ग्रामीणों ने उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन खड़ी और गहरी खाई के कारण वे सफल नहीं हो सके। आखिरकार जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) मंडी के नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई। इसके बाद थुनाग में तैनात एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जानकारी के अनुसार सुनाह गांव की तेबना कुमारी की गाय रोजाना की तरह चर रही थी। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह करीब 100 फुट गहरी खाई में जा गिरी। घटना का पता चलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर गाय को खाई से निकालने का प्रयास किया, लेकिन खाई काफी गहरी और सीधी होने के कारण उनके लिए नीचे उतरना बेहद जोखिम भरा था। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने डीडीएमए मंडी के नियंत्रण कक्ष को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही थुनाग में तैनात एसडीआरएफ की टीम सहायक उप निरीक्षक तेज प्रताप सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम के सामने चुनौती आसान नहीं थी। करीब 100 फुट गहरी खाई में नुकीले पत्थर और घनी झाड़ियां थीं। ऐसे में जरा सी चूक जवान के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती थी। इसके बावजूद टीम ने पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एक जवान रस्से के सहारे खाई में उतरा। नीचे पहुंचने पर उसने देखा कि गाय एक पत्थर पर अटकी हुई थी और बुरी तरह डरी हुई थी। जवान ने पहले उसे शांत किया और उसके सिर पर हाथ फेरकर पुचकारा। इसके बाद सावधानी से गाय को रस्सों से बांधा गया। ऊपर खड़े एसडीआरएफ जवानों और ग्रामीणों ने मिलकर रस्सों के सहारे गाय को धीरे-धीरे ऊपर खींचना शुरू किया। करीब एक घंटे तक चले इस जोखिम भरे रेस्क्यू अभियान के बाद आखिरकार गाय को सुरक्षित खाई से बाहर निकाल लिया गया। गाय की मालकिन तेबना कुमारी ने कहा कि यह गाय उनके परिवार के सदस्य जैसी है और उसके बिना उनका घर अधूरा है। उन्होंने भावुक होकर एसडीआरएफ टीम का आभार जताया और कहा कि जवानों ने समय पर पहुंचकर उनकी गाय की जान बचाई। एसडीएम थुनाग संजीत कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए एसडीआरएफ टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में साहस और तत्परता का परिचय देते हुए गाय को सुरक्षित बाहर निकाला। यह रेस्क्यू अभियान एक बार फिर साबित करता है कि आपदा की घड़ी में एसडीआरएफ केवल इंसानों की ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों की जान बचाने के लिए भी पूरी तत्परता से काम करती है।