गांव की समस्याओं को समझकर विकास की सही प्राथमिकताएं तय करना और सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना पंचायत प्रतिनिधियों की अहम जिम्मेदारी है। नवनियुक्त पंचायत प्रतिनिधियों को इसी जिम्मेदारी का अहसास करवाते हुए धर्मपुर विकास खंड कार्यालय में आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। प्रशिक्षण शिविर के दूसरे बैच के अंतिम दिन एसडीएम धर्मपुर जोगिंदर पटियाल ने पंचायत प्रतिनिधियों को उनके दायित्वों और ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि गांव के विकास और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी हैं। एसडीएम जोगिंदर पटियाल ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत प्रतिनिधि को अपने क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की वास्तविक जरूरतों की जानकारी होनी चाहिए। इससे विकास कार्यों की प्राथमिकताएं बेहतर तरीके से तय की जा सकेंगी और उपलब्ध संसाधनों का सही दिशा में उपयोग होगा। एसडीएम ने प्रतिनिधियों को ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत और ग्रामीणों के बीच मजबूत संवाद होने से स्थानीय समस्याओं की पहचान और उनके समाधान में आसानी होगी। प्रशिक्षण सत्र के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न सवाल एसडीएम के समक्ष रखे। प्रतिनिधियों ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीणों को मिलने वाले लाभ और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने को लेकर अपनी जिज्ञासाएं रखीं। एसडीएम जोगिंदर पटियाल ने प्रतिनिधियों के सवालों का विस्तार से जवाब दिया और उनकी शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि जितना अधिक योजनाओं, नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी रखेंगे, उतनी ही बेहतर तरीके से वे अपने क्षेत्र के लोगों का मार्गदर्शन कर पाएंगे। इस अवसर पर बीडीओ धर्मपुर सौरभ ठाकुर ने भी पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायतों के कार्यों, विकास योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने प्रतिनिधियों से प्रशिक्षण के दौरान हासिल जानकारी को पंचायत स्तर पर व्यावहारिक रूप से लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में शामिल हैं और नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रशिक्षण शिविर में प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों, दायित्वों और पंचायतों में होने वाले विभिन्न विकास कार्यों की प्रक्रिया से भी अवगत करवाया गया। चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पंचायत के कामकाज और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों को समझने का अवसर मिला। अधिकारियों ने प्रतिनिधियों से अपील की कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी का इस्तेमाल पंचायतों के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए करें। इस अवसर पर पंचायत निरीक्षक संजय पराशर, एडवोकेट प्रताप सिंह सकलानी, कार्यवाहक पंचायत निरीक्षक सुनील बरवाल और सीओ सुरेश कौंडल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।