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कुल्लू: देवी-देवताओं के मिलन से स्वर्गलोक बनी अठारह करडू सौह

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के मिलन से अठारह करडू सौह स्वर्गलोक जैसा नजर आ रहा है। देवभूमि कुल्लू में इन दिनों आस्था, श्रद्धा और सदियों पुरानी देव परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। दशहरा उत्सव के दौरान घाटी के देवी-देवता साल भर के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे से मिल रहे हैं। इस देव मिलन को देखने के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु भी अलौकिक दृश्य देखकर भावविभोर हो उठते हैं। उत्सव के दौरान देवी-देवताओं के मिलन की परंपरा का विशेष रूप से निर्वहन किया जा रहा है। देवी-देवता एक-दूसरे के शिविरों में पहुंचकर भेंट कर रहे हैं। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों और देव संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। देवी-देवताओं के आगमन और आपसी मिलन से अठारह करडू सौह का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि घाटी की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का प्रतीक भी है। यहां विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं का एकत्रित होना और एक-दूसरे से मिलना उत्सव की विशिष्ट पहचान है। साल भर बाद होने वाले इस मिलन का श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार रहता है। अठारह करडू सौह में देवी-देवताओं के शिविरों के बीच हो रही भेंट और पारंपरिक देव रीति-रिवाज श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आ रहा है। देवी-देवताओं के मिलन का यह दृश्य कुल्लू की प्राचीन परंपराओं और लोगों की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है।

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