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कुल्लू में ऑटो यूनियन का कार्यालय उखाड़ने पर बवाल, डीसी कार्यालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल; कार्रवाई की मांग

संगम गुड्स कैरियर ऑटो यूनियन के कार्यालय के लिए बनाए गए शेड को उखाड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यालय हटाए जाने से नाराज यूनियन पदाधिकारी अब प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचे हैं। यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत पत्र सौंपा और पूरे मामले की जांच करवाकर उचित कार्रवाई की मांग की। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें यह जगह वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की अनुमति से प्रदान की गई थी। इसके बाद तत्कालीन विधायक महेश्वर सिंह ने यहां बनाए गए कार्यालय का उद्घाटन भी किया था। ऐसे में अब कार्यालय को अवैध बताकर उखाड़े जाने पर यूनियन ने सवाल खड़े किए हैं। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि जब कार्यालय का निर्माण हुआ और इसका उद्घाटन किया गया, उस समय प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। ऐसे में अब अचानक इसे अवैध बताकर हटाए जाने का औचित्य समझ से परे है। उनका कहना है कि अगर उस समय सरकार और प्रशासन की अनुमति से उन्हें जगह उपलब्ध करवाई गई थी तो वर्षों बाद उनके कार्यालय को अवैध बताकर हटाने का फैसला क्यों लिया जा रहा है। इसी सवाल को लेकर यूनियन ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यूनियन पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस तर्ज पर उनकी यूनियन को सरकार और प्रशासन की ओर से जगह उपलब्ध करवाई गई थी, उसी तरह क्षेत्र में ट्रक यूनियन, जीप यूनियन और सवारी ढोने वाले ऑटो यूनियन की पार्किंग और कार्यालय भी बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनका कार्यालय अवैध है तो फिर अन्य यूनियनों के कार्यालय और पार्किंग व्यवस्था को किस आधार पर वैध माना जा रहा है। पदाधिकारियों ने कहा कि केवल गुड्स कैरियर ऑटो यूनियन के कार्यालय को ही निशाना बनाया जाना उन्हें किसी साजिश का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। यूनियन ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि मामले की पूरी जांच कराई जाए। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में उनका कार्यालय अवैध पाया जाता है तो समान कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित कार्यालयों को भी हटाया जाए। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई में पारदर्शिता और समानता होनी चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से मौजूद व्यवस्था को अचानक बदलने से पहले प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्यालय को पहले किस आधार पर जगह दी गई थी और अब उसे किस आधार पर अवैध माना जा रहा है। फिलहाल प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत पत्र के माध्यम से प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रख दिया है। अब यूनियन पदाधिकारियों की नजर प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर है।

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