हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल के गांव कुसियार में बागवानी के क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। यहां एचपीशिवा परियोजना की मदद से करीब आठ हेक्टेयर बंजर भूमि पर मौसंबी का बागीचा तैयार किया गया है। बागीचे में लगाए गए लगभग 7,500 पौधों में से करीब 1,100 पौधों से इस बार पहली फसल मिली है। वहीं, अन्य छोटे पौधों में भी फल आने के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं। इस सीजन में अच्छी पैदावार की उम्मीद से गांव के बागवान उत्साहित हैं। कुसियार की मौसंबी अब स्थानीय बाजारों के अलावा पंजाब के लुधियाना, जालंधर और अन्य शहरों की मंडियों तक पहुंचने लगी है। कुसियार के प्रगतिशील बागवान मोहिंद्र कुमार ने बताया कि बागवानी विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को एचपीशिवा परियोजना के तहत मौसंबी का बागीचा लगाने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने मौसंबी के करीब 1,100 पौधे लगाए। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में ही कुछ पौधों पर फल आने शुरू हो गए थे। उस दौरान उन्होंने करीब 30 क्विंटल मौसंबी बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की थी। इस बार उन्हें करीब 70 क्विंटल पैदावार होने की उम्मीद है। मोहिंद्र कुमार के अनुसार, इस सीजन में अब तक करीब 60 क्विंटल मौसंबी की तुड़ाई की जा चुकी है। फल स्थानीय बाजारों के साथ पंजाब के लुधियाना, जालंधर और अन्य शहरों की मंडियों में भेजे जा रहे हैं। उन्हें इस बार मौसंबी की बिक्री से दो लाख रुपये से अधिक की आय होने की उम्मीद है। गांव के अन्य बागवान भी मौसंबी की खेती में रुचि ले रहे हैं। बागवान शक्ति चंद शर्मा ने बताया कि उन्होंने पिछले साल मौसंबी के 150 पौधे लगाए हैं। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि विभाग के अधिकारी एचपीशिवा परियोजना के तहत बागवानों को विभिन्न सुविधाओं और पौधों की देखभाल के बारे में नियमित रूप से मार्गदर्शन दे रहे हैं। कुसियार में मौसंबी की खेती से बंजर भूमि का उपयोग हो रहा है और स्थानीय बागवानों को आमदनी का नया अवसर मिल रहा है। पंजाब की मंडियों तक फल पहुंचने से इस क्षेत्र की बागवानी को भी पहचान मिलने लगी है।