आत्महत्या की सोच किसी व्यक्ति के मन में अचानक पैदा नहीं होती, कई बार उसके व्यवहार में पहले ही इसके संकेत दिखाई देने लगते हैं। ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानकर बातचीत और उपचार के जरिए व्यक्ति को संभाला जा सकता है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बुधवार को जिला नागरिक अस्पताल में लोगों को आत्महत्या के खिलाफ जागरूक किया गया और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान लोगों को बताया गया कि मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय उसके बारे में बात करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है। कार्यक्रम में आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संकट में घिरे व्यक्ति का साथ देने का संदेश दिया गया। अस्पताल में बढ़ रहे आत्मघाती विचार वाले मरीज जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी के आंकड़े बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर मदद लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2023 में मनोरोग ओपीडी में 13,068 मरीज पहुंचे थे, जो 2024 में 14,799 और 2025 में बढ़कर 19,108 हो गए। 2026 में अब तक 15,401 मरीज ओपीडी में पहुंच चुके हैं। रोजाना औसतन 100 से 120 मरीज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। आत्महत्या की प्रवृत्ति या विचार वाले मरीजों की संख्या भी पिछले वर्षों में बढ़ी है। 2024 में 45, 2025 में 67 और 2026 में अब तक 82 मरीज ऐसे सामने आए हैं। इन मरीजों को काउंसिलिंग और उपचार दिया गया है। जरूरत के अनुसार कई मरीजों को भर्ती भी किया गया। मरीज के साथ परिवार के सदस्यों की भी काउंसिलिंग और नियमित फॉलोअप किया जाता है। अकेलेपन से दूरी बनाने तक, ये संकेत न करें नजरअंदाज मनोचिकित्सक के अनुसार परिवार को व्यक्ति के व्यवहार में अचानक आए बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति लोगों से बातचीत करना बंद कर दे, अकेले रहने लगे, अपनी पसंद की हॉबी या काम में रुचि खो दे अथवा लगातार नकारात्मक बातें करने लगे तो इसे सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। “जिंदगी का कुछ पता नहीं”, “अब कोई आशा नहीं रही” या “कुछ करके क्या ही कर लूंगा” जैसे वाक्य भी गंभीर मानसिक परेशानी का संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार छोटी-सी पारिवारिक या व्यक्तिगत कलह भी मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति के लिए बड़ा संकट बन जाती है। कर्ज और लोन एप का दबाव भी परेशानी मनोचिकित्सा डॉक्टर सौभाग्य कौशिक ने बताया कि अकेलापन मानसिक संकट का प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहा है। इसके अलावा पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी और कर्ज का दबाव भी लोगों की मानसिक स्थिति प्रभावित कर रहा है। नए लोन एप से जुड़े कर्ज और उसके दबाव के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में परिवार को व्यक्ति से बहस या झगड़ा करने के बजाय उसके पास बैठकर उसकी बात सुननी चाहिए। यदि वह बात करने के लिए तैयार है तो उसे समझने का प्रयास करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर तक पहुंचाना चाहिए। एक टीम कर रही मरीजों की काउंसिलिंग अस्पताल में आत्मघाती विचार या प्रवृत्ति वाले मरीजों के उपचार में डॉक्टर के साथ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिक सोशल वर्कर की टीम काम करती है। मरीज और परिवार दोनों की काउंसिलिंग के साथ नियमित फॉलोअप किया जाता है। मानसिक संकट की स्थिति में टेली मानस की 24 घंटे उपलब्ध सेवा से भी मदद ली जा सकती है।