लखीमपुर खीरी के धौरहरा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद भी कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ईसानगर में नदी लगातार किसानों की कृषि योग्य भूमि और खड़ी फसलों को अपने आगोश में ले रही है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 11 गांवों में लगभग 50 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। वहीं, सैकड़ों एकड़ भूमि पर कटान का खतरा मंडरा रहा है और हजारों एकड़ कृषि भूमि अब भी जलमग्न है। इससे किसानों की फसलें बर्बाद होने के साथ ही उनकी उपजाऊ जमीन भी नदी में समा रही है।
धौरहरा तहसील क्षेत्र के कैरातीपुरवा, बेलागढ़ी, ओझापुरवा, चपकहा, मिलिक, सियापुर, सधुवापुर समेत करीब 27 गांव जलभराव से प्रभावित हैं। वहीं ओझापुरवा, कैरातीपुरवा, दुर्गापुर पड़री, चपकहा, चंदौली, मिलिक, डुड़की, रामलोक, जंगल सुजानपुर, गुलरिया तालुके अमेठी और परसा समेत 11 गांवों में घाघरा का कटान जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के कटान की चपेट में आने से खेतों में खड़ी फसल और उपजाऊ जमीन लगातार नदी में समा रही है। इसके बावजूद कटान रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। सधुवापुर निवासी अजय श्रीवास्तव, तारावती और कौशल्या देवी, चंदौली निवासी हरेंद्र पाल सिंह तथा चकदहा निवासी सद्दीक और काशीराम समेत कई किसानों के खेत कटान की चपेट में आ चुके हैं।