अब हिंदी में बुक कर सकेंगे वेबसाइट का डोमेन, लिख सकेंगे .भारत, .दुकान

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Wed, 29 Aug 2018 10:45 AM IST
You will be able to book soon Domain name like Dukan and India
domain

    वह दिन दूर नहीं जब जूता.दुकान और @हरियाणा.भारत जैसे डोमेन नेम देखने को मिलेंगे। वहीं राजस्थान देश का इकलौता राज्य है जिसने राज्य के नाम से हिन्दी में पहली बार ईमेल अड्रेस सर्विस शुरू की है। जल्द ही हिन्दी समेत दूसरी 21 भारतीय भाषाओं में भी डोमेन नेम हासिल कर सकेंगे। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भारतीय भाषाओं में डोमेन नेम और ईमेल अड्रेस बुक कराने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है।

    देश में 481 मिलियन इंटरनेट यूजर

    आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2017 तक भारत में 481 मिलियन इंटरनेट यूजर हैं। जिनमें शहरी क्षेत्र के 295 मिलियन इंटरनेट यूजर्स में से 193 मिलियन भारतीय भाषाओं में पढ़ना पसंद करते हैं, जबकि ग्रामीण भारत में यह संख्या 186 मिलियन है, जिनमें से 141 मिलियन स्थानीय भाषा में सामग्री पढ़ते हैं। वहीं 2016 के आंकड़ों बताते हैं कि देश में 581 मिलियन लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि 101 मिलियन बंगाली, 91 मिलियन तेलगु, 89 मिलियन मराठी, 75 मिलियन तमिल, 56 मिलियन गुजराती, 46 मिलियन कन्नड़ और 40 मिलियन मलयालम भाषी हैं।

    हिन्दी में टाइप कर सकेंगे डोमेन नेम

    दुनियाभर में इंटरनेट डोमेन नेम प्रणाली को मैनेज करने वाली अमेरिकी संस्था द इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइंड नेम्स एंड नंबर्स (आईसीएएनएन) ने इसे लेकर पहल शुरू कर दी है। आईसीएएनएन के इंडिया हेड समीरन गुप्ता के मुताबिक अंग्रेजी नहीं जानने वाले लोग भी ऑनलाइन जाकर अपनी स्थानीय भाषा में डोमेन नेम लिख कर मनचाही वेबसाइट को देख सकेंगे। फिलहाल यूजर्स को हिंदी या अन्य भाषाओं की वेबसाइट पर जाने के लिए अंग्रेजी में ही डोमेन नेम लिखना करना पड़ता है। वह बताते हैं कि नौ भारतीय लिपियों देवनागरी, बांग्ला, गुजराती, गुरूमुखी, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, तमिल, मलयालम और तेलुगू में यह काम चल रहा है और जल्द ही इससे जुड़ी कई दूसरी भाषाएं भी कवर हो जाएंगी।

    गूगल नहीं देता यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस

    यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस स्टीयरिंग ग्रुप (यूएएसजी) के चेयरमैन राम मोहन ने बताया कि आमतौर पर डोमेन .क़ॉम या .इन 2 या 3 अक्षरों का होता है। पूरी दुनिया में 48 भाषाओं में डोमेन बुक हो सकते हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं में यह संभव नहीं हो सका है। गूगल की जीमेल और व्हाट्सएप भी भारतीय भाषाओं में विश्वव्यापी स्वीकार्यता नहीं देता है। वहीं केवल माइक्रोसॉफ्ट की एप्स ही यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस को तैयार हैं। वह बताते हैं कि यह समस्या 2001 से चली आ रही है और 2018 में भी हम वहीं खड़े हुए हैं।

    हिन्दी में वॉयस कंट्रोल

    राम मोहन के मुताबिक हमारी अगली पीढ़ी मोबाइल या लैपटॉप पर टाइपिंग नहीं करने वाली, बल्कि वह वॉयस से कंट्रोल करेगी। गूगल होम और एलेक्सा अब इसी तर्ज पर काम कर रहे हैं। गूगल होम भारतीय भाषाओं में आवाज को पहचान कर टाइप करने की प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय भाषाओं में डोमेन नेम होने से ग्रामीण इलाके के लोंगों को काफी फायदा होगा। इससे उनके लिए संभावनाओं की नई राह खुल जाएगी और सुदूर इलाकों में भी इंटरनेट का तेजी से प्रसार होगा।

    ‘मन की बात’ को हिन्दी मेल से नहीं कर सकते सब्स्क्राइब

    डाटा एक्सजेन टेक्नोल़जीज के फाउंडर डॉक्टर अजय डेटा बताते हैं कि हिन्दी में बने किसी भी ईमेल आईडी से प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के न्यूजलेटर को अभी सब्स्क्राइब करना संभव नहीं हो सका है। न ही आप अपनी भाषा में फेसबुक अकाउंट बना सकते हैं और न ही ट्विटर अकाउंट बना सकते हैं और यही सबसे बड़ी चुनौती है।

    सर्च इंजन और सभी प्रमुख ब्राउजर यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने बताया कि उनके निओ ब्राह्मी जनरेशन पैनल पर गुरुमुखी, देवनागरी, कन्नड़, गुजराती, तेलगू और उड़िया भाषा में अपने कमेंट लिख सकते हैं। वहीं मलयालम, बंगाली और तमिल भाषा पर तेजी से काम चल रहा है। उनकी कंपनी ने हाल ही में कोरियाई भाषा में मेल.कॉम पर ईमेल सर्विस देने की शुरू की है। जबकि अरबी, रूसी, थाई और चीनी भाषा में ईमेल सर्विसेस देने वाली भारत की पहली आईटी फर्म बन चुकी है।

    राजस्थान मेल.राजस्थान.भारत पर

    डाटामेल.भारत के कंट्री हेड आशीष मोदी के मुताबिक राजस्थान देश का अकेला पहला ऐसा राज्य है जिसने मेल.राजस्थान.भारत पर हिन्दी में ईमेल अड्रेस बुक कराने की शुरूआत की है। वहीं राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी नागरिक मुफ्त में हिन्दी में ईमेल आईडी बना सकते हैं। साथ ही राज्य सरकार ने मोबाइल एप भी शुरू की है। मोदी का कहना है कि वहीं तकरीबन 750 मिलियन पढ़े-लिखे ग्रामीण इंटरनेट का यूज नहीं कर रहे हैं। अगर हिन्दी में डोमेन नेम बनाने की सुविधा मिलती है तो इंटरनेट यूजर्स की संख्या 39 फीसदी तक बढ़ सकती है। वहीं फिलहाल देश की कुल आबादी में से लगभग 65 फीसदी ही हिंदी को जानने-समझने वाले हैं। जबकि अंग्रेजी जानने-समझने वालों की तादाद महज पांच फीसदी ही है। बाकी 30 फीसदी यूजर्स गैर-हिंदी और गैर-अंग्रेजी जानने वाले हैं।

    Login or Signup
    अपना शहर चुनें