Union Budget 2026: कल आने वाले बजट से टेक दिग्गजों को बड़ी उम्मीदें, AI-डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस की मांग

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Sat, 31 Jan 2026 05:28 PM IST
सार

Tech Companies' Demands To Union Budget:

केंद्रीय बजट 2026-27 से एक दिन पहले भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। वित्त मंत्री की ओर से रविवार (01 फरवरी 2026) को पेश किए जाने वाले बजट से उद्योग जगत को भी काफी उम्मीदें है। जिसे देखते हुए टेक जगत ने सरकार से इंटेलिजेंस फर्स्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग की है।

Union Budget 2026-27 Tech companies demand focus AI innovation digital infrastructure semiconductor growth
Union Budget 2026 - फोटो : X

    विस्तार

    कल यानी रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इस बार के बजट में पूरी दुनिया की नजरें भारत के टेक रोडमैप पर टिकी हैं। हाल ही में आए आर्थिक सर्वेक्षण ने ये साफ कर दिया है कि एआई (AI) अब केवल मनोरंजन या चैटबॉट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा स्तंभ बनने वाला है। आइए जानते हैं कि टेक जगत के बड़े खिलाड़ी इस बजट से क्या चाहते हैं।

    एआई को आर्थिक रणनीति बनाने की तैयारी

    आर्थिक सर्वेक्षण में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक आर्थिक रणनीति के रूप में देखा गया है। टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ और एआई फर्म AIONOS के वाइस चेयरमैन सीपी गुरनानी का कहना है कि भारत के पास दुनिया की बेहतरीन इंजीनियरिंग प्रतिभा और विविध डेटा मौजूद है। यानी टेक कंपनियां चाहती हैं कि सरकार ऐसे छोटे और स्थानीय एआई मॉडल्स बनाने में मदद करे, जो भारत की स्थानीय भाषाओं और समस्याओं को सुलझा सकें। इससे भारत न केवल दुनिया को सॉफ्टवेयर देगा, बल्कि एआई के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेगा।

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    स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और हर घर पर असर

    लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स सेक्टर भी इस बार बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। सॉफ्टवेयर फर्म FarEye का मानना है कि अगर हमें सामानों की डिलीवरी सस्ती और तेज करनी है, तो एआई और ऑटोनॉमस (स्वतंत्र) सिस्टम में निवेश करना होगा। तो इससे क्या होगा फायदा? अगर लॉजिस्टिक्स की लागत कम होती है, तो इसका सीधा असर आपके घर पहुंचने वाले सामान की कीमत पर पड़ता है। उद्योग जगत चाहता है कि बजट में डिजिटल वर्कफ्लो और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाली तकनीकों को बढ़ावा मिले।

    सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर निगाहें

    चिप्स (सेमीकंडक्टर्स) के बिना आज का कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट चाहे वो फोन हो या कार कुछ भी नहीं बन सकता। IESA (इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन) के अनुसार, भारत में चिप बनाने के कई बड़े प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरने को तैयार हैं। इसलिए ये कंपनियां चाहती हैं कि सरकार ISM 2.0 (इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन) की घोषणा करें और इसके लिए भारी-भरकम बजट आवंटित करें। साथ ही, टैक्स नियमों में स्थिरता हो, जिससे विदेशी कंपनियां भारत में लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकें।

    6G और डिफेंस टेक्नोलॉजी के लिए नया इंसेंटिव

    टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचएफसीएल का कहना है कि भारत को 6जी और डिफेंस (रक्षा) तकनीक में रिसर्च बढ़ाने की जरूरत है। इसमें टेक दिग्गजों की मांग है कि सरकार एक नया इनोवेशन-लिंक्ड इंसेंटिव (ILI) शुरू करे। यानी जो कंपनियां नई तकनीक ईजाद करेंगी और पेटेंट रजिस्टर कराएंगी, उन्हें सरकार की तरफ से इनाम या टैक्स में छूट दी जाए।

    डिजिटल इंडिया से इंटेलिजेंस इंडिया का सफर

    आईटी फर्म ग्लोबल लॉजिक और लुमिना डेटामैटिक्स का मानना है कि अभी तक भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे UPI) पर ध्यान दिया है। अब समय आ गया है कि हम इंटेलिजेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ें। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि हमारे डेटा और एआई का उपयोग शिक्षा, रिटेल और पब्लिशिंग जैसे क्षेत्रों को और अधिक स्मार्ट बनाने के लिए किया जाए। इसके लिए क्लाउड प्लेटफॉर्म्स और डेटा सुरक्षा पर निवेश की उम्मीद है।

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