फ्री टीवी एप्स पर ट्राई का नया शिकंजा: क्या आपके स्मार्ट टीवी से गायब हो जाएंगे ये एप्स? समझें पूरा मामला

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 28 Oct 2026 06:06 AM IST
सार

भारत में फ्री टीवी देखने वालों के लिए बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्मार्ट टीवी और इंटरनेट पर फ्री टीवी चैनल्स दिखाने वाले एप्स को रेगुलेट करने की सिफारिश की है। इसके तहत, इन एप्स को सरकार से लाइसेंस लेना होगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन नए नियमों का आप पर, आपके स्मार्ट टीवी और इन स्ट्रीमिंग कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

trai wants to regulate free tv apps what could change for smart tv users explainer
टीवी पर चलने वाले एप्स को लेना होगा अनिवार्य लाइसेंस। - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    अगर आप भी अपने स्मार्ट टीवी या मोबाइल पर इंटरनेट के जरिए फ्री में लाइव टीवी चैनल्स देखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत अहम है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) भारत के 'फ्री टीवी स्ट्रीमिंग मार्केट' में एक नया नियम लाने की तैयारी कर रहा है। ट्राई ने 26 अक्टूबर को एक नई सिफारिश जारी की है, जिसके तहत इंटरनेट पर लाइव टीवी चैनल दिखाने वाले एप्स को अब सरकार से ऑथराइजेशन (लाइसेंस) लेना पड़ सकता है।

    यह कदम स्ट्रीमिंग एप्स, स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियों और ब्रॉडकास्टर्स के पूरे काम करने के तरीके को बदल सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक आम दर्शक के तौर पर, आपके लिए क्या बदलने वाला है? क्या अब फ्री एप्स के पैसे देने होंगे, या ये एप्स बंद हो जाएंगे? आइए, इस एक्सप्लेनर में इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में समझते हैं।

    भारत में कौन-से फ्री टीवी एप्स चलते हैं?

    आजकल लोग केबल और DTH छोड़कर इंटरनेट-बेस्ड टीवी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे प्लेटफॉर्म्स हैं जो इंटरनेट पर फ्री में लाइव टीवी चैनल दिखाते हैं, जिन्हें FAST यानी फ्री एड सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन कहा जाता है। इसका मतलब है ऐसा इंटरनेट टीवी, जिसे देखने के लिए आमतौर पर दर्शक से सब्सक्रिप्शन फीस नहीं ली जाती, बल्कि कमाई विज्ञापनों से होती है। इनमें कुछ प्रमुख एप्स शामिल हैं:

    सैमसंग टीवी प्लस:

    यह सैमसंग के स्मार्ट टीवी पर मिलने वाली फ्री सर्विस है, जिसमें इंडिया टीवी ग्रुप जैसे कई लाइव चैनल्स आते हैं।

    डिस्ट्रो टीवी:

    इसके जरिए सैकड़ों फ्री लाइव टीवी चैनल्स देखे जा सकते हैं। एयरटेल एक्सस्ट्रीम (Airtel Xstream) के यूजर्स भी इसे एक्सेस कर पाते हैं।

    यप टीवी:

    यह भी इंटरनेट टीवी का एक प्लेटफॉर्म है, हालांकि इसकी सर्विस और कीमतें अलग-अलग मार्केट पर निर्भर करती हैं।

    इनमें से कई एप्स स्मार्ट टीवी में पहले से इंस्टॉल्ड आते हैं। लेकिन क्या ये सभी एप्स नए नियमों के दायरे में आएंगे? जवाब है, नहीं। TRAI का फोकस उन एप्स पर है, जो अलग-अलग चैनल्स को इकट्ठा करके लाइव टीवी की तरह दिखाते हैं। यह नियम नेटफ्लिक्स (Netflix) या प्राइम वीडियो (Prime Video) जैसे ऑन-डिमांड वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर लागू नहीं होगा।

    TRAI का नया प्रस्ताव आखिर है क्या?

    ट्राई ने टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत एक नई कैटेगरी बनाने का सुझाव दिया है, जिसे एप्लिकेशन बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रिब्यूशन (ALTD) सर्विस कहा जाएगा। इस कैटेगरी में आने वाले किसी भी एप या वेबसाइट को सर्विस देने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए 1 लाख रुपये की वन-टाइम एंट्री फीस और 10,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। वहीं, यह लाइसेंस 20 साल के लिए मिलेगा और इसके बाद इसे 10-10 साल के लिए रिन्यू किया जा सकेगा।

    क्या अब स्मार्ट टीवी यूजर्स को पैसे देने होंगे?

    यहां आपके लिए थोड़ी राहत की खबर है। TRAI के प्रस्ताव में दर्शकों पर कोई सब्सक्रिप्शन फीस या नया चार्ज लगाने की बात नहीं की गई है। यानी आपको फ्री चैनल्स देखने के लिए सीधे तौर पर कोई पैसा नहीं देना होगा। और न ही आपके टीवी से रातों-रात ये फ्री एप्स गायब होने वाले हैं।

    आम दर्शकों के लिए क्या बदलेगा?

    • बदलाव यह होगा कि कौन-सा एप आपके टीवी पर मौजूद रहेगा, यह अब सरकार तय करेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ऐसे ऑथराइज्ड ALTD एप्स की एक मास्टर लिस्ट तैयार करेगा।
    • टीवी बनाने वाली कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वालों, जैसे- Android या Tizen को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके टीवी या एप स्टोर में सिर्फ वही एप्स मौजूद हों, जिनके पास सरकार का लाइसेंस है।
    • इससे दर्शकों की शिकायतों का निपटारा भी आसान होगा, क्योंकि एप्स अब सीधे सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे।

    सैमसंग टीवी प्लस और डिस्ट्रोटीवी का क्या होगा?

    • अब सवाल ये है कि नए नियम से सैमसंग टीवी प्लस और डिस्ट्रोटीवी जैसे एप्ल पर क्या असर होगा और क्या इन एप्स को भी लाइसेंस लेना होगा? यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि इनके बिजनेस मॉडल पर अंतिम नियम कैसे लागू होते हैं।
    • हालांकि, इसमें कुछ छूट भी दी गई है। अगर कोई ब्रॉडकास्टर अपने खुद के टीवी चैनल्स अपने ही एप पर दिखा रहा है, तो उसे इस नियम से बाहर रखा जा सकता है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाली लाइव स्ट्रीम्स को भी इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

    TRAI क्यों लाना चाहता है यह नियम?

    दरअसल, केबल टीवी या DTH ऑपरेटर्स सरकार के कड़े नियमों के तहत काम करते हैं। लेकिन इंटरनेट पर चैनल्स दिखाने वाले एप्स के लिए अब तक ऐसा कोई ठोस नियम नहीं था। इसी को देखते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में TRAI से FAST सेवाओं के लिए नियम बनाने को कहा था। इसका मकसद सभी प्लेटफॉर्म्स को एक समान नियम के दायरे में लाना और दर्शकों के हितों की रक्षा करना है।

    आगे क्या होगा?

    फिलहाल ये सिर्फ TRAI की सिफारिशें हैं। अब सरकार इन प्रस्तावों पर विचार करेगी। अगर इन्हें मंजूरी मिल जाती है, तो इन नियमों को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा। तब तक के लिए, आप अपने स्मार्ट टीवी पर बिना किसी रुकावट के अपनी पसंदीदा लाइव टीवी स्ट्रीमिंग का आनंद ले सकते हैं।

    और पढ़ें...