Nepal: सोशल मीडिया बैन पर नेपाल में मचा बवाल; जानिए भारत में फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टा के लिए क्या हैं कानून

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 08 Sep 2025 06:31 PM IST
सार

Social Media Regulations In India:

नेपाल में सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगने के बाद बवाल मचा हुआ है। आइए जानते हैं भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के लिए क्या कानून बनाए गए हैं।

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भारत में तीन कानूनों के तहत रेगुलेट होता है सोशल मीडिया - फोटो : AI

    विस्तार

    नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे तमाम छोटे-बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने के वजह से आंदोलन भड़क उठे हैं। बैन के विरोध में नेपाल के कई शहरों और इलाकों में युवाओं का प्रदर्शन जारी है जिसके वजह से आपातकाल जैसी स्थिती पैदा हो गई है। सरकार का कहना है कि नेपाल में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध इसलिए लगाए गए क्योंकि ये सरकार द्वारा बनाए गए नियमों को पालन नहीं कर रहे थे और बिना पंजिकरण के ही चल रहे थे।

    नेपाल में इसलिए बैन हुआ सोशल मीडिया

    नेपाल सरकार के मुताबिक, गैर-पंजिकृत प्लेटफॉर्म्स के लिए बुधवार (3 सितंबर) की अंतिम डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन कई एप्स और साइट्स ने खुद को पंजिकृत नहीं करवाया जिसके बाद अधिकतर वेबसाइट्स और एप्स लोगों की पहुंच से बाहर हो गए। कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह भी आरोप था कि ये बेरोकटोक विदेशी विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म्स पर दिखा रहे थे।

    इन तीन कानूनों की है अहम भूमिका
    इन तीन कानूनों की है अहम भूमिका - फोटो : अमर उजाला

    क्यों जरूरी है रेगुलेशन?

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने को लेकर लगभग हर देश अपने अनुसार कानून बनाते हैं। देखा जाए तो इन प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना भी जरूरी है, ताकि हिंसा, अश्लीलता या गलत जानकारी फैलाने वाले कंटेंट को रोका जा सके और इन्हें इस्तेमाल करने वाले हर एक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित हो। भारत में भी सोशल मीडिया को रेगुलेट करने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। तो चलिए जानते हैं भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कौन-कौन से कानून लागू होते हैं।

    भारत में क्या हैं कानून?

    सोशल मीडिया कंपनियां "इंटरमीडियरी" कहलाती हैं, क्योंकि वे यूजर्स के बीच कंटेंट शेयर करने का जरिया हैं। अगर भारत में किसी प्लेटफॉर्म के 50 लाख से ज्यादा यूजर हैं, तो वह एक बड़ी सोशल मीडिया कंपनी मानी जाती है। भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे तमाम बड़े प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स करोड़ों में हैं। इसलिए भारत सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के लिए मजबूत कानून बनाए हैं। देश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मुख्य तौर पर तीन कानूनों से नियंत्रित किया जाता है, इनमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (आईटी एक्ट), आईटी नियम 2021 और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (डीपीडीपी एक्ट) शामिल हैं। ये नियम कंपनियों को जिम्मेदार बनाते हैं। अगर वे नियम नहीं मानें, तो उन पर भारी जुर्माना, जेल या प्लेटफॉर्म बंद करने जैसी सजाएं हो सकती हैं। आइए सरल भाषा में इनकी पूरी जानकारी समझते हैं...

    नए कानूनों से रेगुलेशन को मजबूत बनाने पर जोर
    नए कानूनों से रेगुलेशन को मजबूत बनाने पर जोर - फोटो : AI

    1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (आईटी एक्ट, 2000)

    • यह भारत में इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहला बड़ा कानून है।
    • धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को “सेफ हार्बर” (कानूनी सुरक्षा) मिलती है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट डाला है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे कंपनी पर नहीं आती।
    • लेकिन यह सुरक्षा तभी तक है जब कंपनी सरकार के बनाए नियमों का पालन करती रहे। अगर नियम तोड़े जाते हैं तो यह सुरक्षा खत्म हो जाती है और कंपनी पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    2. आईटी नियम, 2021

    • फरवरी 2021 में सरकार ने आईटी नियम 2021 लागू किए। यह सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बेहद अहम बदलाव था।
    • 50 लाख से ज्यादा यूजर वाले प्लेटफॉर्म्स को सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमिडियरी माना, यानी इन्हें बड़े प्लेटफॉर्म्स का दर्जा दिया गया और उन पर कड़े प्रावधान लागू हुए।
    • इसके तहत कंपनियों को भारत में तीन अधिकारी नियुक्त करने होंगे, जिनमें चीफ कंप्लायंस ऑफिसर,नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और रेजिडेंट ग्रीवेंस ऑफिसर (शिकायत निवारण अधिकारी) शामिल होंगे।
    • किसी भी शिकायत पर 24 घंटे में जवाब देना और 15 दिन में समाधान करना अनिवार्य है।
    • हर महीने पारदर्शिता रिपोर्ट जारी करनी होगी जिसमें शिकायतों और हटाए गए कंटेंट का विवरण होगा।
    • आपत्तिजनक और यौन शोषण संबंधी कंटेंट को 24 घंटे में हटाना अनिवार्य बनाया गया है।
    • कंपनियों को कंटेंट और यूजर डेटा का रिकॉर्ड 180 दिन तक सुरक्षित रखना होगा।
    • गंभीर मामलों में सरकारी एजेंसी को 72 घंटे के भीतर जरूरी जानकारी देनी होगी।

    3. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP एक्ट, 2023)

    • यह कानून यूजर डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी सुनिश्चित करता है।
    • कंपनियों को यूजर्स की सहमति से ही डेटा इकट्ठा करने और इस्तेमाल करने की अनुमति है।
    • डेटा का गलत इस्तेमाल करने पर या डेटा ब्रीच की स्थिति में भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

    पालन न करने पर कंपनियों पर कार्रवाई के प्रावधान

    • सेफ हार्बर का नुकसान:अगर कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं तो उन्हें धारा 79 की सुरक्षा नहीं मिलेगी। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए वे खुद जिम्मेदार ठहराई जा सकती हैं।
    • भारी जुर्माना:DPDP Act, 2023 के तहत डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • कानूनी कार्रवाई और प्रतिबंध:सरकार कंपनियों को नोटिस जारी कर सकती है, उनकी सेवाओं को सीमित या बंद कर सकती है और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई भी संभव है।
    • ऑपरेशनल दबाव:कंपनियों को भारत में ऑफिस और अधिकारी नियुक्त करने, पारदर्शिता रिपोर्ट जारी करने और लोकल सर्वर पर डेटा रखने जैसे खर्च उठाने पड़ते हैं। पालन न करने पर उनका भारत में संचालन मुश्किल हो सकता है।

    भारत में सोशल मीडिया कंपनियों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त नियम लागू हो चुके हैं। इन नियमों को यूजर्स की सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और पारदर्शिता के लिए लागू किया गया है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इन प्रावधानों से यूजर की प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

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