प्रोजेक्ट सनकैचर: अंतरिक्ष से आया एआई का पहला संदेश, गूगल ने सैटेलाइट पर सफलतापूर्वक चलाया अनोखा Gemma 4 मॉडल

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Sat, 31 Oct 2026 09:42 AM IST
सार

गूगल ने अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट पर जेम्मा 4 एआई (Gemma 4 AI) मॉडल सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी को सैटेलाइट से पहला पूरा जवाब भी मिला, जो स्पेस पर एक हाइकू था। अब गूगल टीपीयू चिप्स को अंतरिक्ष के तापमान और रेडिएशन के बीच परखने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का अगला लक्ष्य 2027 में दो सैटेलाइट को आपस में जोड़ना है।

Google Project Suncatcher Successfully Runs Gemma 4, Receives First Response from Orbit
गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    क्या कोई सैटेलाइट स्पेस में बैठकर एआई मॉडल चला सकता है और धरती पर उसका जवाब भेज सकता है? अब यह सिर्फ एक सवाल ही नहीं है, बल्कि गूगल ने इसका जवाब भी हां में दिया है। गूगल ने अंतरिक्ष में मौजूद अपने सैटेलाइट पर एआई मॉडल काे सफलतापूर्वक चलाकर पृथ्वी पर उसका पूरा जवाब हासिल कर लिया है। ऐसा गूगल के प्रोजेक्ट संकैचर के तहत संभव हुआ है, जिसमें अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की संभावनाओं पर काम चल रहा है।

    ‘हैलो वर्ल्ड’: सुंदर पिचाई का बड़ा एलान

    • गूगल ने पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अपने प्रोटोटाइप सैटेलाइट पर एआई मॉडल सफलतापूर्वक चलाया है। इसके बाद सैटेलाइट से मिला पहला पूरा रिस्पॉन्स पृथ्वी पर प्राप्त किया गया।
    • इस मौके पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है। साथ ही उन्होंने इस उपलब्धि को प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए 'हैलो वर्ल्ड' मील का पत्थर बताया। पिचाई के मुताबिक, टीम ने पहले सैटेलाइट को कमांड भेजा। इसके बाद उसमें मौजूद टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) को चालू किया, AI मॉडल पर प्रॉम्प्ट चलाया और फिर उसका पूरा जवाब पृथ्वी पर हासिल किया। यह जवाब एक छोटी-सी कविता यानी हाइकू के रूप में था।

    गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर क्या है?

    • प्रोजेक्ट सनकैचर कंपनी का एक रिसर्च प्रोजेक्ट है। इसमें कंपनी यह पता लगाना चाहती है कि क्या भविष्य में भी बड़े स्तर पर एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है। यानी की गूगल का यह जांच रहा है कि क्या सैटेलाइट की मदद से अंतरिक्ष में एआई मॉडल चलाए जा सकते हैं और क्या कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर बड़े एआई वर्कलोड संभाले जा सकते हैं।
    • कंपनी का मकसद यह समझना है कि अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप्स और दूसरे सिस्टम कितने भरोसेमंद तरीके से काम कर सकते हैं।
    गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर
    गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर - फोटो : अमर उजाला

    जेम्मा 4 एआई मॉडल से बनवाया अंतरिक्ष पर हाइकू

    • गूगल के इस प्रयोग का एक खास हिस्सा ऑनबोर्ड जेम्मा 4 ओपन मॉडल था। कंपनी की टीम ने ग्राउंड स्टेशन से संपर्क के दौरान सैटेलाइट पर मौजूद इस एआई मॉडल को एक प्रॉम्प्ट भेजा।
    • इसमें मॉडल से अंतरिक्ष के बारे में एक हाइकू यानी छोटी कविता लिखने के लिए कहा गया था। सैटेलाइट ने इस प्रॉम्प्ट पर जवाब तैयार किया और टीम को यह जवाब तब मिला, जब वह नॉर्वे के स्वालबार्ड के ऊपर से गुजर रहा था।
    • इसके बाद गूगल ने सिस्टम को दूसरे प्रॉम्प्ट देकर भी परखा। इनमें अंतरिक्ष से जुड़े लिमरिक यानी छोटी तुकबंदी वाली कविताएं लिखने और सैटेलाइट के सिस्टम की तकनीकी स्थिति बताने जैसे निर्देश शामिल थे।
    • इस तरह कंपनी ने सिर्फजेम्मा से कविता ही नहीं लिखवाई, बल्कि सैटेलाइट के सिस्टम से जुड़ी जानकारी हासिल करने का परीक्षण भी किया।
    गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर
    गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर - फोटो : amarujala.com

    अब गूगल का अगला लक्ष्य क्या है?

    • थर्मल स्ट्रेस:अंतरिक्ष में तापमान से जुड़े कठिन हालात में चिप्स कैसे काम करती हैं।
    • रेडिएशन एक्सपोजर:अंतरिक्ष में मौजूद रेडिएशन का चिप्स और उनकी कंप्यूटिंग क्षमता पर क्या असर पड़ता है।
    • इन परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या टीपीयू चिप्स अंतरिक्ष में लंबे समय तक एआई से जुड़े काम भरोसेमंद तरीके से कर सकती हैं।

    2027 में दो सैटेलाइट को जोड़ने की तैयारी

    • गूगल का कहना है कि मौजूदा परीक्षण सफल रहने पर कंपनी 2027 में अगले बड़े चरण की ओर बढ़ सकती है। इसमें दो सैटेलाइट को आपस में जोड़ने का मील का पत्थर शामिल है।
    • प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत कंपनी यह भी तलाश रही है कि क्या कई सैटेलाइट का एक नेटवर्क यानी कांस्टेलेशन बनाया जा सकता है। ऐसा नेटवर्क भविष्य में बड़े AI वर्कलोड संभालने के काम आ सकता है।
    • अभी यह एक रिसर्च और परीक्षण का हिस्सा है। कंपनी को पहले यह साबित करना होगा कि अंतरिक्ष में मौजूद चिप्स और दूसरे कंप्यूटिंग सिस्टम लगातार और भरोसेमंद तरीके से काम कर सकते हैं।
    • साथ ही गूगल का यह भी मानना है कि लो अर्थ ऑर्बिट यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट लगभग लगातार सूर्य की रोशनी प्राप्त कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, ऐसे में ये सैटेलाइट पृथ्वी की तुलना में आठ गुना तक ज्यादा सोलर पावर जनरेट कर सकते हैं।
    • यही वजह है कि गूगल अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की संभावना तलाश रहा है। हालांकि, इसके लिए अभी कई तकनीकी चुनौतियों को पार करना बाकी है।