Google Fined: क्या गूगल जमा भी करेगा सवा दो हजार करोड़ रुपये! बचाव के ये कानूनी दांव-पेच भी जान लीजिए

आशीष तिवारी
Wed, 26 Oct 2022 04:08 PM IST
सार

गूगल के ऊपर बीते एक सप्ताह के भीतर तकरीबन सवा दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है। फिलहाल गूगल की ओर से भी उन सभी दरवाजों को खटखटाया जाएगा जिससे कंपनी को राहत मिल सके।

google fined rs 2274 crore Will Google deposit fine or not  know these legal tricks of defense
google new - फोटो : istock

    विस्तार

    बीते कुछ दिनों में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से गूगल और दुनिया की अन्य बड़ी कंपनियों पर हजारों करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। चूंकि जुर्माने की राशि इतनी बड़ी है इसलिए पूरे देश में इस बात की चर्चा भी हो रही है कि आखिर इतना जुर्माना कंपनियां देती भी हैं या नहीं। कानूनी जानकारों का मानना है कि आयोग की ओर से लगाए जाने वाले जुर्माने को रोकने के लिए दुनिया भर की इन तमाम कंपनियों के पास नेशनल अपीलेट ट्रिब्यूनल से लेकर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले रहते हैं। जहां पर यह कंपनियां जुर्माने का कुछ हिस्सा बतौर फीस जमा करके आयोग की ओर से लगाए गए जुर्माने पर स्टे और फिर सुनवाई के लिए आगे बढ़ जाती हैं। जानकारी के मुताबिक गूगल के ऊपर बीते एक सप्ताह के भीतर तकरीबन सवा दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है। फिलहाल गूगल की ओर से भी उन सभी दरवाजों को खटखटाया जाएगा जिससे कंपनी को राहत मिल सके।

    गूगल पर देश के इंडियन डेवलपर एसोसिएशन और एंड्रॉइड के माध्यम से अपनी सर्विसेज को देने वाली कंपनियों ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में मुकदमा किया था। इस पूरे मामले को देखने वाली टीम से जुड़े एक अहम सदस्य बताते हैं कि इंडियन डेवलपर एसोसिएशन का आरोप था कि गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से गूगल भारतीय कानून की न सिर्फ धज्जियां उड़ा रहा है बल्कि उनको मिलने वाली सुविधाओं के लिए वह अपनी शर्तों को पूरा भी नहीं कर रहा है। इसी तरीके से एक अन्य कंपनी जो कि तमाम तरह की डेटिंग एप्स को भी संचालित करती हैं, उसका आरोप था कि गूगल एंड्रॉइड सिस्टम में अपनी मनमर्जी चलाता है और उनको सेवा शर्तों के मुताबिक न सुविधाएं देता है बल्कि उनसे मनमानी फीस भी वसूलता है। आयोग में इस मामले की सुनवाई के बाद पाया गया कि गूगल के खिलाफ दायर की गई याचिकाएं सही हैं। उपभोक्ताओं की न सिर्फ अनदेखी की जा रही है बल्कि गूगल अपनी मनमर्जी से प्रतिस्पर्धा को बाधित भी कर रहा है। यही वजह रही कि बीते एक सप्ताह के भीतर दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई करते हुए आयोग ने पहले 1,338 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और फिर मंगलवार को 936 करोड़ रुपये का दोबारा जुर्माना लगाया। यानी कुल 2,274 करोड़ रुपये के जुर्माने को अदा करने के लिए आयोग ने गूगल को आदेश दिए।

    एक सप्ताह के भीतर 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना जब गूगल पर लगाया गया तो देश के अलग-अलग सेक्टर में चर्चाएं होने लगी कि क्या वास्तव में इतना बड़ा जुर्माना कंपनी अदा भी करेगी या नहीं। इंडियन डेवलपर्स एसोसिएशन से जुड़े जतिन मिन्हास कहते हैं कि गूगल को जुर्माना तो जमा ही करना होगा। हालांकि जतिन कहते हैं गूगल के पास अभी कई तरीके के कानूनी विकल्प खुले हुए हैं। लेकिन वह अपने हक की लड़ाई के लिए आगे तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि गूगल का इतना बड़ा प्लेटफार्म और प्रभाव है कि वह छोटे डेवलपर और उनसे होने वाली प्रतिस्पर्धाओं को अपने प्रभाव से कहीं का नहीं रखता है। ऐसे में मेक इन इंडिया जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने में गूगल न सिर्फ बाधक हो रहा है बल्कि हमारे यंग टैलेंट को भी तमाम तरीके की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वह कहते हैं कि इसी वजह से उनकी संस्था ने प्रतिस्पर्धा आयोग का दरवाजा खटखटाया था। वह कहते हैं जब आयोग ने उनके आरोपों को सही पाया तो गूगल के ऊपर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया। उनका कहना है कि यह बड़ा जुर्माना है। यही वजह है कि देश में चर्चा भी हो रही है कि वास्तव में इतना जुर्माना कंपनी अदा करेगी या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र गुप्ता कहते हैं कि आयोग जुर्माना तो लगा सकता है लेकिन जिसके ऊपर जुर्माना लगाया जाता है उस कंपनी के पास कई कानूनी विकल्प भी होते हैं। गुप्ता कहते हैं कि आयोग की ओर से जुर्माना लगाए जाने के बाद कंपनी के पास नेशनल अपीलेंट ट्रिब्यूनल में उनके खिलाफ आए फैसले की सुनवाई के लिए रास्ता खुला होता है। इसके अलावा उनके पास ट्रिब्यूनल से भी मामला खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला होता है। वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र गुप्ता कहते हैं कि जब आयोग की ओर से बड़ा जुर्माना लगाया जाता है तो ट्रिब्यूनल में जुर्माने का कुछ फीसदी हिस्सा जमा कराकर मामले की सुनवाई के लिए अपील की जाती है। उसके बाद ट्रिब्यूनल में सुनवाई होती है। गुप्ता कहते हैं अगर ट्रिब्यूनल में जिस कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था वह केस जीत जाती है तो उसका जमा किया हिस्सा वापस कर दिया जाता है। ट्रिब्यूनल में कंपनी अगर केस हार जाती है तो कंपनी के पास सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता खुला रहता है। उनका कहना है कि आयोग की ओर से जिन कंपनियों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता है वह अपने वैकल्पिक कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करती हैं।

    गूगल पर लगाए जाने वाले भारी भरकम जुर्माने के बाद कंपनी ट्रिब्यूनल से लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने पर विचार कर रही है। इस पूरे मामले को कानूनी नजरिए से देखने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि अभी इस मामले में विचार किया जा रहा है कि किस तरीके का कानूनी कदम उठाया जाए, लेकिन यह तय है कि गूगल अगले कुछ दिनों में इतने भारी भरकम जुर्माने के खिलाफ ट्रिब्यूनल में भी जाएगा और उसके बाद जो भी फैसला आएगा उसके अनुसार आगे का कदम उठाया जाना है। कभी गूगल की लीगल टीम से जुड़े रहे एक अधिवक्ता का कहना है कि 2018 में भी आयोग की ओर से गूगल के ऊपर जुर्माना लगाया गया था। जिसके खिलाफ गूगल ट्रिब्यूनल में गया था। फिलहाल अभी ट्रिब्यूनल में उस मामले की सुनवाई चल रही है। अभी तक उस पर कोई फैसला नहीं आया है।

    भारत में गूगल ही नहीं बल्कि अन्य कंपनियों पर अपने प्रभाव का फायदा उठाने और दूसरी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में शामिल न करने का आरोप लगता रहा है और उनको संबंधित अथॉरिटी की ओर से नोटिस भी जारी किया जाता रहा है। इसमें नेटफ्लिक्स, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन और व्हाट्सएप जैसी कंपनियों को भी नोटिस भेजा गया है। अभी हाल ही में एपल कंपनी पर मोबाइल के साथ चार्जर ना देने के लिए भी जुर्माना लगाया गया था, जबकि व्हाट्सएप पर उसकी प्राइवेसी पॉलिसी पर मामला आयोग में चल रहा है। जानकारों का कहना है कि जिन मामलों के चलते इन कंपनियों के खिलाफ जुर्माना लगाया था, वह अगले वैकल्पिक कानूनी रुख अख्तियार करते हुए कोर्ट और ट्रिब्यूनल में गए हैं।