भारत-फिनलैंड साथ मिलकर गढ़ेंगे टेक्नोलॉजी का भविष्य: AI समिट में पीएम पेटेरी ओर्पो ने दिया मानवता का संदेश
दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड साथ मिलकर एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों के जरिए दुनिया को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य दे सकते हैं।

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नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने भारत को मानव-केंद्रित तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण साझेदार बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि फिनलैंड, भारत और अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगी मिलकर लचीले, टिकाऊ और लोगों के हित में काम करने वाले तकनीकी ढांचे का निर्माण कर सकते हैं।
"बिल्डिंग सॉवरेन डीप टेक" विषय पर बोलते हुए ओर्पो ने कहा कि जैसे-जैसे कंप्यूटिंग पावर की मांग बढ़ रही है, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विश्वविद्यालयों और उद्योगों दोनों को सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं तक पर्याप्त पहुंच मिले। उनका कहना था कि भविष्य की मजबूत और टिकाऊ तकनीक के लिए पूरी वैल्यू चेन और उसके सामाजिक प्रभाव को समझना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि फिनलैंड में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। वहां का इनोवेशन मॉडल दशकों से पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी पर आधारित है। उनका मानना है कि ऐसी साझेदारी के जरिए एआई सतत विकास को गति दे सकता है, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे सकता है और जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण व जैव विविधता जैसे मुद्दों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।
इस सत्र में भारत और फिनलैंड के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, क्वांटम कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी के डिजिटल नेटवर्क जैसे उन्नत क्षेत्रों में बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने माना कि फिनलैंड की रिसर्च, इंजीनियरिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता, भारत की विशाल प्रतिभा और एप्लीकेशन इकोसिस्टम के साथ मिलकर गहरे तकनीकी समाधानों को वैश्विक स्तर पर लागू करने की मजबूत नींव तैयार करती है।
फिनलैंड के सांसद टीमो हराका ने कहा कि आज की दुनिया में मजबूत तकनीक की शुरुआत लोगों से होती है। मानव-केंद्रित नवाचार, उच्च कौशल और जिम्मेदार शासन ही तकनीकी लचीलापन सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी संप्रभुता का अर्थ अलग-थलग पड़ना नहीं, बल्कि भरोसेमंद सहयोग के जरिए लोगों, पर्यावरण और प्रगति को केंद्र में रखना है।
कार्यक्रम में फिनिश इनोवेशन फंड 'सिट्रा' के अध्यक्ष अट्टे यास्केलैनन, रीऑर्बिट के संस्थापक एवं सीईओ सेथु सावेडा सुवनम, इंफोसिस के सेंटर फॉर इमर्जिंग टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस से मंजनाथा कुक्कुरु, नोकिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पासी टोइवानेन और सीएससी आईटी सेंटर की निदेशक मारी वॉल्स सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
सत्र में इस बात पर सहमति बनी कि खुले, सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। साथ ही, रिसर्च को जमीनी स्तर पर लागू कर दीर्घकालिक तकनीकी मजबूती और संप्रभुता हासिल की जा सकती है।
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