EV: ईवी सेल में 25 % का इजाफा, पर क्या लाखों का प्राइस गैप कम कर पाएगी सरकार? जानें चौंकाने वाले आंकड़े
EV sales India FY26:
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री वित्तीय वर्ष 26 में 25 प्रतिशत से बढ़कर 24.5 लाख यूनिट तक पहुंच गई, लेकिन ऊंची कीमत, कमजोर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तमाम कारणों की वजह से 2030 का 30% EV लक्ष्य हासिल करना अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। जानिए इन आकंड़ो को लेकर क्या कहती है सरकार और फाडा की रिपोर्ट...

विस्तार
Mahindra eSUV record delivery
: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट तेजी से आगे बढ़ रहा है। FY26 में EV बिक्री 25 प्रतिशत बढ़कर 24.5 लाख यूनिट तक पहुंच गई। नए मॉडल्स, बेहतर सप्लाई चेन और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती स्वीकार्यता इस ग्रोथ के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। इस रफ्तार को आगे बढ़ाने में महिंद्रा एंड महिंदा्र जैसी कंपनियों की अहम भूमिका है। इस कंपनी ने एक साल में करीब 50 हजार ईएसयूवी डिलीवर किए, जिसके बाद मार्च 2026 उसका अब तक का सबसे मजबूत महीना साबित हुआ।
लेकिन अगर बात आंकड़ो की करें तो इसके पीछे की तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। निती आयोग के अनुसार 2024 में कुल वाहन की बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी मात्र 7.6 प्रतिशत थी। वहीं, फाडा यानी की फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि ईवी की मांग अभी बड़े शहरों तक ही सीमित है। जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इसे अपनाने की रफ्तार अभी भी धीमी है।
कीमत बनी सबसे बड़ी बाधा
जानकारों का कहना है कि ईवी अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट इसकी ऊंची कीमत सामने आ रही है। एक इलेक्ट्रिक कार की शुरुआती कीमत करीब 13 लाख रुपये है, जो पेट्रोल कारों से काफी ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर देखें तो ह्ययूंदै क्रेटा के पेट्रोल कार की कीमत करीब 12.8 लाख रुपये है, लेकिन इसका इलेक्ट्रिक वर्जन करीब 19.5 लाख रुपये तक जाता है। हालांकि ईवी की रनिंग कॉस्ट कम होती है, लकिन ज्यादातर भारतीय ग्राहक शुरुआती कीमत को देखकर ही फैसला लेते हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
देश में 29 हजार से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन ये ज्यादातर बड़े शहरों में ही केंद्रित हैं। फाडा के अनुसार, छोटे और ग्रामीण इलाकों में अभी भी चार्जिंग नेटवर्क की कमी ईवी को अपनाने में रोड़ा बनी हुई है। यही वजह है कि रेंट एंग्जायटी आज भी लोगों के मन में बनी हुई है।
वहीं, भारत अभी भी बैटरी और लिथियम जैसे कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। ग्लोबल सप्लाई में किसी भी तरह का व्यवधान ईवी इंडस्ट्री को प्रभावित कर सकता है। सरकार की फेम, पीएम ई-ड्राइव और पीएलआई जैसी योजनाएं मदद कर रही हैं, लेकिन बार-बार पॉलिसी बदलाव से निवेशकों में असमंजस बना रहता है।
फाडा ने क्या कहा?
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार ईवी की डिमांड मेट्रो शहरों में मजबूत है। वहीं छोटे शहरों में ग्राहकों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं बना है। ऐसे में चार्जिंग और सर्विस नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है।