प्रेस की आजादी पर DPDP एक्ट का असर नहीं: IT मंत्री बोले- निजता कानून के बीच भी सुरक्षित है मीडिया, जानें मामला

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Wed, 28 Oct 2026 04:59 PM IST
सार

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि डीपीडीपी एक्ट प्रेस की आजादी का उल्लंघन नहीं करता है और संविधान इसकी गारंटी भी देता है। उनका बयान ऐसे समय आया, जब डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने इस कानून और इसके नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आइए जानते हैं पूरे मामले को विस्तार से...

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DPDP Act Doesn't Violate Press Freedom, Constitution Guarantees It, IT Minister Ashwini Vaishnaw
डीपीडीपी एक्ट पर आया केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट को लेकर सरकार और न्यूज पब्लिशर्स के बीच बहस तेज होती जा रही है। अब केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि इस कानून का कोई भी प्रावधान प्रेस की आजादी का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान पत्रकारिता की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और सरकार का इसे प्रभावित करने का कोई इरादा नहीं है। आईटी मंत्री ने यह बयान ऐसे समय पर दिया, जब न्यूज पब्लिशर्स ने कानून के संभावित पत्रकारिता संबंधी प्रभावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। प्रकाशकों की चिंता है कि कानून में पत्रकारिता के लिए खास छूट नहीं होने से खोजी रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की जांच मुश्किल हो सकती है।

    डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पर क्या बोले अश्विनी वैष्णव?

    • केंद्रीय मंत्री ने प्रेस से जुड़े पेशेवरों को सरकार के साथ बातचीत करने का न्योता दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कानून को लकर जो भी चिंताएं हैं, उन पर खुलकर चर्चा की जानी चाहिए।
    • अश्विनी वैष्णव का कहना है कि भारत का संविधान पत्रकारिता की आजादी की गारंटी देता है और यह स्वतंत्रता पूरी तरह कायम भी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता प्रभावित हो, सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। मंत्री ने यह भी जोर दिया कि डीपीडीपी कानून प्रेस की आजादी को बनाए रखता है। साथ ही उन्होंने बताया कि यह प्राइवेसी कानून सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद लाया गया था।

    डीएनपीए ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दी चुनौती?

    • वैष्णव का बयान डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की ओर से डीपीडीपी एक्ट और इसके नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के एक दिन बाद आया है। बता दें कि डीएनपीए देश के 21 समाचार प्रकाशकों का अगुवाई करता है।
    • इसपर न्यूज पब्लिशर्स का तर्क है कि कानून में पत्रकारिता से जुड़ी गतिविधियों के लिए खास छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पत्रकारों को जनहित से जुड़े मामलों की पड़ताल करते समय कई तरह की कानूनी शर्तों का सामना करना पड़ सकता है।

    नोटिस और सहमति की शर्तों पर क्या है आपत्ति?

    • पब्लिशर्स ने कानून के तहत नोटिस देने, सहमति लेने और व्यक्तिगत डेटा हटाने से जुड़ी शर्तों पर चिंता जताई है। उनके अनुसार, इन शर्तों की वजह से पत्रकारों के लिए ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करना मुश्किल हो सकता है, जिनमें किसी व्यक्ति या संस्था के कथित गलत कामों की जांच की जा रही हो।
    • पब्लिशर्स ने पत्रकारिता के स्रोतों की निजता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। खोजी पत्रकारिता में कई बार अहम जानकारी ऐसे सूत्रों से मिलती है, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पब्लिशर्स को आशंका है कि डेटा से जुड़े नियमों का पत्रकारिता पर असर पड़ने से ऐसे स्रोतों की गोपनीयता बनाए रखना कठिन हो सकता है। हालांकि, ये समाचार पब्लिशर्स की ओर से उठाई गई आशंकाएं हैं। सरकार का कहना है कि DPDP एक्ट प्रेस की आजादी का उल्लंघन नहीं करता।

    सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या होगा?

    • डीपीडीपी एक्ट और इसके नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है।
    • अब इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई खास हो सकती है। साथ ही इससे यह भी साफ होगा कि डेटा संरक्षण कानून और पत्रकारिता से जुड़ी चिंताओं पर अदालत का रुख क्या रहता है।
    • फिलहाल, सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के आरोपों से इनकार किया है, जबकि समाचार प्रकाशक कानून में पत्रकारिता के लिए खास छूट की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।