डार्क नेट पर रक्त प्लाज्मा की हो रही अवैध बिक्री, जालसाज बता रहे कोरोना के इलाज में कारगर

Rajeev Rai
टेक डेस्क, अमर उजालाRajeev Rai
Sat, 23 May 2020 11:29 PM IST
Cyber Fraudsters offering blood plasma as COVID 19 cure on Dark Net
साइबर क्राइम(सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

    कोरोना आपदा के बीच साइबर अपराध में काफी बढ़ोतरी हुई है। साइबर जालसाज इससे जुड़ी चीजों को अपना निशाना बना रहे हैं। फिलहाल एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें साइबर जालसाजों द्वारा कोविड-19 से ठीक हुए रोगियों के रक्त प्लाजमा को अवैध ढंग से डार्क नेट पर बेचते पाया गया है। यहां पर ये साइबर अपराधी प्लाज्मा को कोरोना वायरस संक्रमण के चमत्कारिक इलाज के तौर पर प्रचार कर रहे थे। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    भारत समेत अन्य देशों में कोविड-19 के गंभीर मामलों के उपचार के लिए प्रायोगिक आधार पर प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग किया जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस के विशेष पुलिस महानिरीक्षक यशस्वी यादव के मुताबिक अपराधी इसी बात का फायदा उठाते हुए, ठीक हुए मरीजों के प्लाजमा (रक्त का एक घटक) को डार्क नेट पर चमत्कारिक इलाज के तौर प्रचारित कर इसे बेचने की पेशकश कर रहे हैं।'

    उन्होंने कहा, ‘हमारी टीम इसकी जां हमें इस तरह के किए गए प्रचार के स्क्रीन शॉट मिल गए हैं।’ पुलिस के मुताबिक इस तरह की अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के अलावा, साइबर पुलिस सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और गलत सूचनाओं पर भी नजर रख रही है।

    देश में पहली बार, महाराष्ट्र साइबर पुलिस आपत्तिजनक सामग्री ऑनलाइन प्रसारित करने वालों को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 149 के तहत नोटिस भेज रही है। धारा 149 पुलिस को संभावित अपराध को रोकने के लिए कदम उठाने की शक्ति देता है। यादव ने कहा कि अब तक 122 ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं को नोटिस भेजे जा चुके हैं और 60 से अधिक लोगों द्वारा पोस्ट या साझा की गई आपत्तिजनक सामग्री को हटा दिया गया है।

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