AI बना साइबर जासूसी का हथियार: 14 देशों के 200 से ज्यादा संगठन निशाने पर, मंत्रालय-रक्षा कंपनियां भी प्रभावित
सार
क्राउडस्ट्राइक ने चीन से जुड़े हैकर समूह वेपर पांडा के एआई आधारित साइबर जासूसी अभियान का खुलासा किया है। इसमें आर्टेक्स एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क और डीपसीक समेत अन्य एआई मॉडल का इस्तेमाल कर 14 देशों के 200 से अधिक संगठनों को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने नेटवर्क में घुसपैठ कर बैकडोर तैनात किया और लॉगिन क्रेडेंशियल हासिल करने की कोशिश की।

विस्तार
एआई का इस्तेमाल अब साइबर जासूसी अभियानों को बड़े पैमाने पर अंजाम देने के लिए भी किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी क्राउडस्ट्राइक ने चीन से जुड़े हैकर समूह ‘वेपर पांडा’ के ऐसे ही अभियान का खुलासा किया है। इसमें एआई आधारित एजेंटिक फ्रेमवर्क से 14 देशों के 200 से अधिक संगठनों को निशाना बनाया गया। इनमें कई मंत्रालय व सरकारी विभाग शामिल थे।
एआई की मदद से 14 देशों में साइबर जासूसी अभियान
- इन संगठनों में सरकारी संस्थान, विदेश मंत्रालय, रक्षा-सेमीकंडक्टर क्षेत्र की कंपनियां, दवा निर्माता तथा दूरसंचार सेवाएं शामिल हैं। 17 अक्तूबर से शुरू इस अभियान में हैकर समूह ने आर्टेक्स नामक ओपन-सोर्स एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क के साथ चीन में विकसित डीपसीक और एक अन्य व्यावसायिक एआई मॉडल का इस्तेमाल किया।
- मंत्रालयों पर भी निशाना क्राउडस्ट्राइक की रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावरों ने संगठनों में पहुंच हासिल कर ब्लडअल्केमी नामक बैकडोर तैनात किया। नेटवर्क की पड़ताल तथा लॉगिन क्रेडेंशियल हासिल किए। 12 अन्य संगठनों के खिलाफ पासवर्ड सूचनाएं पाने के प्रयास भी दर्ज किए गए हैं। निशाने पर एक यूरोपीय देश का विदेश मंत्रालय, राष्ट्रपति-पीएमओ दफ्तर निशान पर हैंं।
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एआई आधारित टूल्स की वजह से साइबर हमलों का तरीका बदल रहा है। जहां पहले हैकर्स को कई तकनीकी काम खुद करने पड़ते थे, वहीं एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क कुछ प्रक्रियाओं को तेजी से और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
- इससे सरकारी विभागों, कंपनियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े नेटवर्क की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में संगठनों के लिए नेटवर्क की निगरानी, मजबूत पासवर्ड व्यवस्था, लॉगिन गतिविधियों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान करना अहम हो जाता है।