चीन में फूटा एआई का बुलबुला: चार महीने में 40 लाख करोड़ हुए स्वाहा, टेक कंपनियों की दहाड़ क्यों हुई कम?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 28 Oct 2026 07:01 AM IST
सार

China AI Bubble Burst: दुनिया भर में जहां एआई (AI) का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है, वहीं चीन में ऐसा कहा जा रहा है कि इसका बुलबुला फूट चुका है। महज चार महीने के अंदर चीनी शेयर बाजार के STAR50 इंडेक्स में 40% की भारी गिरावट आई है, जिससे करीब 480 अरब डॉलर स्वाहा हो गए। चीनी टेक और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरने के आखिर क्या कारण हैं। आइए जानते हैं इस बड़े क्रैश की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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चीन में एआई कंपनियों के शेयर हुए धड़ाम। - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    दुनिया भर में जब टेक स्टॉक्स डगमगा रहे हैं, तब चीन में कहानी बड़े क्रैश तक पहुंच चुकी है। एआई (AI) की मांग में कमी की आशंकाओं और चीनी निर्यात पर अमेरिकी पाबंदियों की चिंताओं के बीच चीन का एआई का बुलबुला अब पूरी तरह से फूट चुका है। आसमान छूती वैल्यूएशन वाली टेक कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए हैं और पिछले कुछ महीनों में चीनी बाजार में ऐसा भूचाल आया है, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है।

    4 महीने में स्वाहा हुए 480 अरब डॉलर

    इस क्रैश का सबसे बड़ा असर मेनलैंड चाइना के STAR50 इंडेक्स पर पड़ा है। यह इंडेक्स एआई और सेमीकंडक्टर की दिग्गज कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। महज चार महीने से भी कम समय में यह इंडेक्स 40% तक लुढ़क गया है। इस गिरावट ने बाजार से लगभग 480 अरब डॉलर (करीब 40 लाख करोड़ रुपये) की मार्केट वैल्यू को गायब कर दिया है।

    यह क्रैश न सिर्फ दुनिया भर के डगमगाते बाजारों के लिए एक बुरा संकेत है, बल्कि चीन सरकार की उन कोशिशों को भी बड़ा झटका है, जिसके तहत एआई बूम को फंड करने के लिए आम लोगों को शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था।

    2 साल से चल रहे बुल रन पर लगा ब्रेक

    यह गिरावट उस रैली का अंत है, जो पिछले दो वर्षों से आर्थिक प्रोत्साहन के वादों के दम पर दौड़ रही थी। बीजिंग की कोशिश थी कि बाजार को तेजी और मंदी के पुराने पैटर्न से निकालकर एक स्थिर मार्केट में बदला जाए, जो लगातार और भरोसेमंद रिटर्न दे। लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा। चीन का ब्रॉड ब्लू-चिप इंडेक्स भी जून के अपने उच्चतम स्तर से लगभग 20% नीचे आ चुका है।

    खास बात यह है कि चीन में एआई स्टॉक्स अमेरिका और एशिया के अन्य बाजारों के मुकाबले कहीं ज्यादा ओवर-वैल्यूड हो गए थे। जहां अमेरिकी नैस्डैक में सिर्फ 6% का करेक्शन दिखा है, वहीं चीन में हालात काफी खराब हैं।

    छोटे निवेशकों का भरोसा क्यों टूटा?

    • गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई शेयरों की हिस्सेदारी चीन के मार्केट कैप में 42% और मेनलैंड व हॉन्गकॉन्ग के ट्रेडिंग वॉल्यूम में 57% तक पहुंच गई थी। चीन का मार्केट ज्यादातर छोटे (रिटेल) निवेशकों से चलता है, इसलिए इस क्रैश में सबसे ज्यादा नुकसान भी उन्हीं का हुआ है।
    • रिटेल निवेशकों के पसंदीदा शेयरों का हाल सबसे बुरा है। लिस्टिंग के समय 8,000 गुना सब्सक्राइब होने वाले रोबोट-मेकर यूनिट्री (Unitree) के शेयर अगस्त से अब तक आधे रह गए हैं। वहीं, चिपमेकर CXMT ने पिछले एक महीने में अपनी एक-चौथाई वैल्यू गंवा दी है। पिछले साल अपने डेब्यू पर 700% और 400% का छप्परफाड़ रिटर्न देने वाले चिपमेकर्स मेटाएक्स (MetaX) और मूर थ्रेड्स (Moore Threads) जुलाई के बाद से 50% तक टूट चुके हैं।
    • रिपोर्ट्स के मुताबिक कई निवेशकों ने यूनिट्री जैसी कंपनियों में सरकारी फंड्स के निवेश को देखकर पैसा लगाया था। उन्हें लगा कि इसे सरकार का समर्थन हासिल है, लेकिन आज वे भारी नुकसान झेल रहे हैं। बीजिंग के समर्थन वाले इन्वेस्टमेंट थीम का ऐसा बुरा अंत देखकर कई निवेशकों ने अब सुरक्षित संपत्तियों का रुख कर लिया है।

    क्या अमेरिकी पाबंदियों से पड़ी मार?

    • इस क्रैश के पीछे अमेरिका का भी बड़ा हाथ है। ऑप्टिकल पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां, जैसे झोंगजी इन्नोलाइट (Zhongji Innolight) और इओप्टोलिंक टेक्नोलॉजी (Eoptolink Technology), अपने जून-जुलाई के उच्चतम स्तर से करीब 60% गिर चुकी हैं। इसका मुख्य कारण वाशिंगटन का वह कदम है, जिसके तहत चीनी कंपनियों को अमेरिकी डेटा सेंटर्स में सप्लाई करने से रोका जा रहा है।
    • भले ही STAR50 इंडेक्स अपने 250 के उच्चतम से नीचे आ गया हो, लेकिन अभी भी इसकी वैल्यूएशन 100 गुना के करीब है। वहीं, निवेशक इसकी तुलना नैस्डैक 100 के 30 गुना मल्टीपल से कर रहे हैं। उन्हें डर है कि यह बिकवाली रुकने से पहले और भी भयंकर रूप ले सकती है। वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो कुछ हो रहा है, वह उन कई टेक कंपनियों के लिए ब्रेक का काम करेगा जो खुद को लिस्ट कराने की तैयारी कर रही थीं।

    बाजार की इस स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि सिर्फ टेक्नोलॉजी के नाम पर कंपनियों में अंधाधुंध पैसा झोंकने का दौर अब खत्म हो रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अन्य चीनी मैन्युफैक्चरर्स की तरह ही चिप और एआई कंपनियां भी आखिर में एक प्राइस वॉर में उलझकर रह जाएंगी। इसका कोई अपवाद नहीं है, हर बुलबुला एक न एक दिन जरूर फूटता है।

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