दिल्ली की नई EV नीति का प्लान: 2030 तक 30% स्कूल बसें होंगी इलेक्ट्रिक, ई-कारों को मिलेगा टैक्स में बड़ा फायदा
Delhi EV Policy 2026:
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज करने के लिए दिल्ली सरकार नई ईवी नीति लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नीति के अनुसार 2030 तक शहर की 30% स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक बनाया जा सकता है। जानिए इसके बारे में विस्तार से...

विस्तार
नई ईवी नीति के तहत दिल्ली में स्कूल ट्रांसपोर्ट को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार नीति लागू होने के दो साल बाद स्कूल बसों का दस प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक होगा। तीन साल में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो जाएगा और ऐसे ही 31 मार्च 2030 तक कुल फ्लीट का 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
किन बसों पर लागू होगा ये नियम?
ये नियम उन सभी बसों पर लागू होगा जो स्कूल के स्वामित्व में लीज पर ली गई हैं या जो किराए पर चल रही हैं। इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को दी जाएगी।
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30 लाख तक की ईवी कारों पर मिल सकती है बड़ी राहत
इसके अलावा अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। सरकार 30 लाख से कम एक्स-फैक्ट्री कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने का विचार कर रही है। यहां ध्यान दें कि 30 लाख से अधिक महंगी लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों पर यह छूट नहीं मिलेगी।
2-व्हीलर और 3-व्हीलर पर बड़ा फैसला
- 1 जनवरी 2027 से: दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा।
- 1 अप्रैल 2028 से: दो-पहिया वाहनों के लिए भी केवल इलेक्ट्रिक मॉडल के रजिस्ट्रेशन की अनुमति होगी।
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सरकारी वाहन भी होंगे पूरी तरह इलेक्ट्रिक
नीति लागू होने के बाद दिल्ली सरकार अपने सभी सरकारी वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक करने की योजना बना रही है। इससे ईंधन खर्च कम होगा, प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और शहर में EV अपनाने की गति बढ़ेगी।
बैटरी कचरे के लिए भी बनेगा नया सिस्टम
ऐसे में माना जा रहा है कि ईवी की संख्या बढ़ने के साथ बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट भी बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को शहर में बैटरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यानी की पुरानी बैटरियां के सुरक्षित निपटान के लिए DPCC (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) शहर भर में बैटरी संग्रह केंद्र स्थापित करेगी। ये केंद्र पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर काम करेंगे, जहां पुरानी बैटरियों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से रिसाइकिल किया जाएगा। साथ ही बैटरियों के सुरक्षित संग्रह, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के लिए SOP भी जारी की जा सकती है।
ईवी नीति से क्या होगा फायदा?
- शहर में वायु प्रदूषण कम होगा।
- इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ेगी।
- स्कूल ट्रांसपोर्ट ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल होगा।
- बैटरी रिसाइक्लिंग सिस्टम मजबूत होगा।