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इन 5 फ़िल्मी गीतों से ख़ास बनाए 'मातृ दिवस' को

हरि कर्की

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  दुनिया का सबसे मुश्किल काम है माँ के ऋण को चुका पाना। उसकी ममता, त्याग, प्रेम और हमें इस दुनिया में लाने के लिए सहन किये गए दर्द के लिए हम सिर्फ़ बदले में उसको ढेर सारा प्रेम ही दे सकते है। माँ ही है जो हमारी हर मुश्किल में साथ खड़ी रहती है, जो हमारी हर छोटी से छोटी चीज़ को याद रखती है। हमारी हर भूल सबसे पहले भूलती है। माँ को भगवान का रूप कहें या प्रकृति को मातृ ताकत से चलाने वाली शक्ति हर उपमा उससे जुड़कर माँ शब्द का ही पर्याय बन जाता है। दुनिया भर में माँ को आदर और प्रेम देने के लिए मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है।  

हिंदी सिनेमा में भी इस रिश्ते को समर्पित कई फ़िल्में बनी हैं। मदर इंडिया, करण-अर्जुन, मॉम और इंग्लिश-विंग्लिश जैसी कुछ फ़िल्में हैं जिसमें माँ के किरदार मुख्य भूमिका में रहे हैैं। साथ ही बॉलीवुड़ में इसी तरह कई गीतों का भी निर्माण हुआ जिसके माध्यम से गीतकारों और संगीतकारों ने इस रिश्ते के उन अहम बिंदुओं को हम तक पहुंचाया। ये गीत समय-समय पर हमारे आपके करीब होते है, जब भी हम मुश्किल हालात में होते हैं या माँ से दूर होते हैं और उसके प्यार को, ममता को महसूस करना चाहते है।
आगे पेश है ऐसे ही पांच गीत-- 
 
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माँ

गीत- माँ 
फ़िल्म- तारे ज़मीन पर 
संगीत- शंकर एहसान लॉय 
गायक- शंकर महादेवन 
गीतकार- प्रसून जोशी 

2007 में आयी ये फ़िल्म तीसरी क्लास में पढ़ रहे एक बच्चे की कहानी है जो डिसलेक्सिया से जूझ रहा होता है इस फ़िल्म का ये गीत उस छोटे 8 साल के बच्चे का अपनी माँ से संवाद है जो उससे दूर है। 


मैं कभी, बतलाता नहीं
पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं, दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब है पता, है न माँ
तुझे सब है पता.. मेरी माँ

भीड़ में, यूँ ना छोड़ो मुझे
घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ
भेज ना इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा.. मेरी माँ 


माई तेरी चुनरिया

गीत- माई तेरी चुनरिया 
फ़िल्म- ए.बी.सी.डी. 2 (2015)
संगीत- सचिन जिगर 
गायक- अरिजीत सिंह 
गीतकार- मयूर पूरी

हमारे सपनों पर हम से भी अधिक विश्वास जिसको होता है वो माँ होती है। वो ही हमें बताती है कि समय के साथ चलना सबसे ज़रूरी है। सपने देखना सबसे ज़रूरी है। सपनों पर विश्वास रखना सबसे ज़रूरी है।

माई तेरी चुनरिया लहराई
झीना झीना झीना रे उड़ा गुलाल
माई तेरी चुनरिया लहराई
रंग तेरी रीत का रंग तेरी प्रीत का
रंग तेरी जीत का है लायी लायी लायी
रंग तेरी रीत का रंग तेरी प्रीत का
माई तेरी चुनरिया लहराई

जब जब मुझपे है, उठा सवाल
माई तेरी चुनरिया लहराई
झीना झीना रे उड़ा गुलाल
माई तेरी चुनरिया लहराई

जग से हारा नहीं मैं
ख़ुद से हारा हूँ माँ
इक दिन चमकूँगा लेकिन
तेरा सितारा हूँ माँ
माई रे.. माई रे..
तेरे बिन मैं तो अधूरा रहा
माई रे.. माई रे..
मुझसे ही रूठी मेरी परछाई

ओ हो.. मेरी परछाई तेरा ख्याल
माई तेरी चुनरिया लहराई


ऐसा क्यों माँ

गीत- ऐसा क्यों माँ  
फ़िल्म- नीरजा  2016 
संगीत- विशाल खुराना 
गायक- सुनिधि चौहान 
गीतकार- प्रसून जोशी 

नीरजा भनोट पर केंद्रित फ़िल्म का ये गीत एक मुक्कमल गीत है। सुनिधि के आवाज़ में जब हम एक छोटी बच्ची का अपनी स्मृति में जाकर माँ से शिकायत करना सुनते हैं तो ऐसा लगता है जैसे माँ अभी ये सब सुनकर सब ठीक कर देगी। वो अपना हाथ प्यार से बालों पर फेरेगी और सब कुछ बचपन की शामों जैसा हो जाएगा। 

लाड़ो..
ऊँगली पकड़ के फिर से सिखा दे 
गोदी उठा ले ना माँ
आँचल से मेरी मुंह पोंछ दे ना 
मैला सा लागे जहां 

आ इ ओ ओ..

आँखें दिखाए मुझे जब ज़िन्दगी 
याद मुझे आती है तेरे गुस्से की 
डांटा भी तो तूने मुझे फूलों की तरह 
क्यूँ नहीं मां सारी दुनिया तेरी तरह 

माथा गरम है, सुबह से मेरा 
रख दे हथेली ना माँ
तूने कुछ खाया 
देर से क्यूँ आई 
कोई न पूछे यहाँ 

आ इ ओ ओ...

हीरा कहा, कभी नगीना कहा 
मुझे क्यूँ ऐसे पाला था मां 
तेरी नज़र से मुझे देखे ना जहां 
दुनिया को तो डांटेगी ना, डांटेगी ना माँ

तेरी नज़र से मुझे देखे ना जाहाँ 
दुनिया को तो डांटेगी ना, डांटेगी ना माँ

मुझको शिक़ायत करनी है सबकी 
मुझको सताते हैं मां
अब तू छुपा ले 


ये बंधन तो प्यार का बंधन है

गीत- ये बंधन तो प्यार का 
फ़िल्म- करण अर्जुन (1995)
संगीत-  राजेश रोशन
गायक-  उदित नारायण, कुमार सानू, अलका याग्निक
गीतकार- इन्दीवर

माँ का विश्वास कितना मजबूत होता है ये फ़िल्म इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है। माँ और बच्चों के प्रेम को ख़ूबसूरती से दिखाता है ये गीत। साथ ही संगीत और बोल आपको साथ जोड़े रखते हैं।

सूरज कब दूर गगन से, चंदा कब दूर किरण से
खुशबू कब दूर पवन से, कब दूर बहार चमन से
ये बंधन तो प्यार का बंधन है, जन्मों का संगम है

तुम्हीं मेरे जीवन हो, तुम्हें देख-देख जी लूंगी
मैं तो तुम्हारे खातिर दुनिया का ज़हर पी लूंगी
तेरे पावन चरणों में आकाश झुका देंगे हम
तेरी राह मे जो शोले हों, तो खुद को बिछा देंगे हम
ये बंधन तो प्यार का बंधन है...

ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत
भगवान नज़र आता है जब देखें तेरी सूरत
जब-जब दुनिया में आएँ, तेरा ही आंचल पाए
जन्मों की दीवारो पर, हम प्यार अपना लिख जाए
ये बंधन तो प्यार का बंधन है...


लुका छुपी बहुत हुई

गीत- लुका छुपी बहुत हुई 
फ़िल्म- रंग दे बसंती (2006)
संगीत- ए आर रेहमान
गायक-   ए आर रेहमान - लता मंगेशकर
गीतकार- प्रसून जोशी

एक उम्दा फ़िल्म जिसके हर किरदार फ़िल्म खत्म होने के साथ आपके मन में हमेशा के लिए एक जगह बना लेता है। उसी तरह ये गीत और उसकी सरगम गाने का नाम लेते ही आपके कानों में जैसे बजने ही लगती हो। माँ और बेटे के संवाद को कैसे लुका छुपी के खेल के साथ जोड़कर प्रसून जोशी ने इसमें उपमाओं का प्रयोग किया है वो इस गीत को और भी ख़ूबसूरत बनाता है।

लुका छुपी बहुत हुई सामने आ जा ना
कहाँ-कहाँ ढूँढा तुझे
थके है अब तेरी माँ
आजा सांझ हुई मुझे तेरी फिकर
धुंधला गयी देख मेरी नज़र आ जा ना
लुका छुपी...

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं
यहाँ उड़ने को मेरे खुला आसमाँ है
तेरे किस्सों जैसा भोला सलोना जहां है
यहाँ सपनों वाला
मेरी पतंग हो बेफिक्र उड़ रही है माँ
डोर कोई लुटे नहीं, बीच से काटे ना
आजा सांझ हुई...

तेरी राह तके अँखियाँ
जाने कैसा-कैसा होए जिया
धीरे-धीरे आँगन उतरे अँधेरा, मेरा दीप कहाँ
ढलके सूरज करे इशारा, चंदा तू है कहाँ
मेरे चंदा तू है कहाँ
लुका छुपी...

कैसे तुझको दिखाऊँ यहाँ है क्या
मैंने झरने से पानी माँ तोड़ के पीया है
गुच्छा-गुच्छा कई ख्वाबों का उछल के छुआ है
छाया लिए भली धूप यहाँ है
नया-नया सा है रूप यहाँ
यहाँ सब कुछ है माँ फिर भी
लगे बिन तेरे मुझको अकेला
आजा सांझ हुई...


5 वर्ष पहले
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