सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र की अपनी एक अलग अदा थी। वह अपनी मुस्कान तथा गुस्सा के लिए प्रसिद्ध रहे। फिल्मी पर्दे पर उन्होंने कुछ अच्छे गीत गाए हैं। इन्हीं गीतों में से एक गीत 1966 में रिलीज उनकी फिल्म 'आए दिन बहार के' का है। इस स्लाइड में हम इसी...और पढ़ें
मुहब्बत में अपने महबूब के साथ बिताया हर पल यादगार होता है। इश्क के सभी लम्हे इत्र की तरह होते हैं जिन्हें याद कर के अपने ज़हन को महकाया जा सकता है। इन्हीं लम्हों के साथ परवान चढ़ती मुहब्बत की हर कहानी मुकम्मल हो जाए ये भी शायद संभव नहीं। जहां दास्तान...और पढ़ें
इक रास्ता है ज़िन्दगी जो थम गए तो कुछ नहीं
ये क़दम किसी मुक़ाम पे जो थम गए तो कुछ नहीं
इक रास्ता है ज़िन्दगी ...
फिल्म 'काला पत्थर' के इस गीत के गीतकार साहिर लुधियानवी हैं और संगीतकार राजेश रोशन। फिल्माया गया है अपनेऔर पढ़ें
रोमांटिक युगल गाने की इतनी भोली जिरह कम ही देखने को मिलती है। मैं बात कर रहा हूँ 'मिस मैरी' फिल्म के 'ओ रात के मुसाफिर चँदा जरा बता दे' गाने की। रफी और लता द्वारा गाया यह गाना प्रेम की उस अवस्था को बयां करता है जब प्रेमी-प्रेमिका, एक...और पढ़ें
वैसे तो महात्मा गांधी पर हिन्दी फिल्मों में कई गाने हैं लेकिन फिल्म 'जागृति' का गीत 'साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल...' ने जितना आम जनमानस को छुआ है संभवतः अन्य किसी गीत को वह प्रसिद्धि नहीं मिल पायी। गांधी जी पर कोई गाना सोचो तो सबऔर पढ़ें
बहुत साल पहले, बीसवीं सदी की शुरुवात में गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत की आज़ादी के संदर्भ में एक कविता (प्रार्थना) लिखी थी- ‘जहाँ मन भय मुक्त हो और सिर सम्मान से उठा हो’। (चित्त जेथ भोय शून्य – where the mind is without fear & the head is held high...और पढ़ें
मोहब्बत में जो वादे प्रेमी और प्रेमिका करते हैं, यह गाना उसी की बानगी है। 1974 की फ़िल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' में यह सुनाई दिया था लेकिन वर्मा मलिक के शब्दों को जब लता मंगेशकर और मुकेश ने आवाज़ दी तो गूँज चिरकालीन हो गयी। इसके शब्दों को संगीतमय...और पढ़ें
हमने सुना था एक है भारत, सब मुल्कों से नेक है भारत
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक से देखा
ये गीत 1959 में बनी फिल्म 'दीदी' का है। यह वह दौर था जब हमारा देश आजाद होने के बाद एक आकार ले रहा था लेकिन विभाजन के दर्द...और पढ़ें
90 के दशक के बाद से बमुश्किल ही किसी फ़िल्मी संगीत और उसके बोलों से कोई गंभीर संबंध जुड़ पाया है। इस दौर में एक ऐसा गाना जिसमें शांत और श्रृंगार रस प्रचुर मात्रा में हो और जिसके बोल अलंकारित हों, वह कानों के लिए कुछ ऐसा दुर्लभ हो गया जैसे पिंजड़े में...और पढ़ें
ज़िंदगी में वक़्त के कुछ हिस्से ऐसे भी होते हैं जब सिवाय अकेलेपन के कोई और आलिंगन को नहीं होता। परन्तु ये भी यूं ही नहीं मिलता; दुनिया के धोखे, अपनों का बिछोह, यारों की गद्दारी और दिल के टूटने के कितने ही जतन होते हैं तब इस आलिंगन का सामिप्य होता है।...और पढ़ें