विज्ञापन

अल्हड़ शोख अंदाज के साथ शो मैन की फकीराना सोच

शरद मिश्र

Mere Azeez Filmi Nagme
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  शो मैन राज कपूर का अल्हड़ शोख अंदाज और दुनिया की फिकर करने की अनुपम सोच इस गीत को अन्य गीतों से अलग खड़ा करती है। 1959 में रिलीज अनाड़ी फिल्म का यह गीत आज भी भागमभाग में लगी इस दुनिया के किसी चमकते और आगे जाते बाशिंदे को ठहरने पर मजबूर कर सकता है । एक युवा का यहां ठहरना इसलिए जायज हो जाता है क्योंकि इस गीत में जीवन के सबसे हसीन सच का बखान जो किया गया है । 
 
विज्ञापन

आदमी अपनों की ओट में जीना चाहता है...

पैसा और यश कमाकर भी आदमी अपनों की ओट में जीना चाहता है । वो चाहता है कि आगे जाने की एक सीमा के बाद वह किसी के काम आए ताकि वह दूसरों की मदद कर अपने जीवन को सफल बना सके । राजकपूर हमें इस गीत में शायद यही याद दिला रहे हैं। गीत में राजकपूर किस तरह से महानगर मुंबई की भीड़ में भी सड़क पर चल रहे एक छोटे से कीट का ध्यान रखते हैं और उसे आदमी के पांव में नीचे आने से पहले उसे एक कागज के टुकड़े में उठाकर बचा लेते हैं। 

शैलेंद्र और राजकपूर की जोड़ी बॉलीवुड में काफी पसंद की गई...

राजकपूर की करूणा इस गीत में देखते ही बनती है। गीतकार शैलेंद्र और राजकपूर की जोड़ी बॉलीवुड में काफी पसंद की गई थी । शैलेन्द्र हिंदी फ़िल्मों के प्रमुख गीतकारों में से एक हैं। उन्होंने राज कपूर के साथ मिलकर  काम किया। 50 व 60 के दशक में उन्होंने सिनेमा में कई बोल लिखे। इसके बाद राज कपूर, शैलेन्द्र और शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने सिनेमा को कई हिट गीत दिए। यह गीत भी उन गीतों में शामिल है । गीतकार शैलेंद्र संगीतकार शंकर जयकिशन और गायक मुकेश की जुगलबंदी की वजह से यह गीत मेरे दिल के काफी करीब है । एक सफल और सुंदर जीवन की गहन व्याख्या इस गीत में की गई है इसलिए भी मैं इस गीत को बेहद पसंद करता हूं । 
 

जो हर लिहाज से सुंदर कहा जा सकता है...

गीत का फिल्मांकन रुपहले पर्दे पर एकदम साधारण तरीके से किया गया है । ताम झाम से दूर इस गीत में जीवन का सबसे बड़ा सच कहा गया है जो हर लिहाज से सुंदर कहा जा सकता है ।  गीत में यह भी कहा गया है कि दर्द तो मिलने पर तू ले लेकिन इस दुनिया में किसी को प्यार भी कर अगर तू किसी को प्यार करने लगेगा तो अपने आप तुझमें दूसरे का दर्द लेने का माद्दा आ जाएगा । गीत की पहली शर्त है कि आदमी पहले जीवन में प्यार करे उसके बाद वह समझ जाएगा कि सही जीवन वह है जो दूसरे के लिए जिया जाए ।
 

जेब से वह फकीर हैं लेकिन दिल से अमीर हैं...

गीत में राज कपूर कहते हैं कि जेब से वह फकीर हैं लेकिन दिल से अमीर हैं । पैसा उनके पास नहीं है पर दूसरे के लिए वह समय देने को हमेशा तैयार हैं । उनके आगे के बोल हैं कि मिटे जो प्यार के लिए वो जिंदगी जले जो बहार के लिए वो जिंदगी...राज कपूर कह रहे हैं चाहे किसी को इन पंक्तियों में भरोसा हो या ना हो लेकिन उनको पूरा ऐतबार है शायद विश्वास के साथ यही फकीरी आपको दुनिया में अन्य आदमी से अलग करती है ।   

जिंदगी को एक लंबा सुकून का रास्ता दिखा रहे हैं...

हिंदी फ़िल्मों के गीतों में मुश्किल से मुश्किल और पेचीदे भाव को सरल शब्दों में अगर किसी ने बेहतरीन अंदाज़ में कहा है तो वो सिर्फ एक नाम है, शैलेंद्र। शैलेंद्र ज़िंदगी को मुश्किल बनाने के हिमायती नहीं रहे बल्कि उन्होंने अपने गीतों में ज़िंदगी को आसान और सहज ही बनाए रखा। इस गीत में भी वह शायद जिंदगी को एक लंबा सुकून का रास्ता दिखा रहे हैं ।

आप चाहे कितनी भी दौलत और यश कमा लो पर आपको दूसरे के लिए जीना नहीं आया तब तक आप महज पानी में लकीर खींचने की कोशिश भर कर रहे हो, तुम सफल नहीं हो रहे हो । तुम्हारी सफलता की सबसे बड़ी कहानी है तुम्हारी वजह से दूसरों के चेहरे में मुस्कान शायद यह गीत यही कह रहा है । अगर आपको इन पंक्तियों से कोई गुरेज है तो इस गीत को एक बार अवश्य सुने । 

किसीके वास्ते हो तेरे दिल में प्यार...

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार
किसीके वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है
किसी की ...

किसी को हो न हो हमें तो ऐतबार...

(माना अपनी जेब से फ़कीर हैं
फिर भी यारों दिल के हम अमीर हैं ) - (२)
मिटे जो प्यार के लिये वो ज़िन्दगी
जले बहार के लिये वो ज़िन्दगी
किसी को हो न हो हमें तो ऐतबार
जीना इसी का नाम है



(रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार का 
ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का ) - (२)
के मर के भी किसी को याद आयेंगे
किसी के आँसुओं में मुस्कुरायेंगे
कहेगा फूल हर कली से बार बार
जीना इसी का नाम है

6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all