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बहुत हो चुकी अयादत, तन्हा छोड़ दो मुझे

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस कदर उजाले भी,अब अच्छे नहीं लगते।
        
                                                    
                            
ये मय भरे प्याले भी अब अच्छे नहीं लगते।।

बहुत हो चुकी अयादत, तन्हा छोड़ दो मुझे।
उजले लिबास चेहरे काले अच्छे नहीं लगते।।

भूंखे रहकर भी खुद्दारी कभी न छोड़ेंगे हम।
ये खैरात में मिले निवाले अच्छे नहीं लगते।।

अपना दर्द छिपाना अब सीख लिया हमने।
अब हमें अश्कों के नाले अच्छे नहीं लगते।।
-यूनुस खान
एक दिन पहले
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