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बहुत हो चुकी अयादत, तन्हा छोड़ दो मुझे

                
                                                         
                            इस कदर उजाले भी,अब अच्छे नहीं लगते।
                                                                 
                            
ये मय भरे प्याले भी अब अच्छे नहीं लगते।।

बहुत हो चुकी अयादत, तन्हा छोड़ दो मुझे।
उजले लिबास चेहरे काले अच्छे नहीं लगते।।

भूंखे रहकर भी खुद्दारी कभी न छोड़ेंगे हम।
ये खैरात में मिले निवाले अच्छे नहीं लगते।।

अपना दर्द छिपाना अब सीख लिया हमने।
अब हमें अश्कों के नाले अच्छे नहीं लगते।।
-यूनुस खान
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9 घंटे पहले

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