विज्ञापन

ये ख्वाब आंखों में पालते रहना।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूं ही , बदस्तूर खत डालते रहना।
        
                                                    
                            
मैं गिरूं, तो मुझे संभालते रहना।।

शब-ए-वस्ल , अगर ख़्वाब है तो।
ये ख्वाब आंखों में पालते रहना।।

जिंदगी, एक समझौता ही तो है।
ताउम्र, खुद को यूं ढालते रहना।।
-यूनुस खान
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13423 कविताएं

View Profile

Anshika Raina

2 कविताएं

View Profile