यूं ही , बदस्तूर खत डालते रहना।
मैं गिरूं, तो मुझे संभालते रहना।।
शब-ए-वस्ल , अगर ख़्वाब है तो।
ये ख्वाब आंखों में पालते रहना।।
जिंदगी, एक समझौता ही तो है।
ताउम्र, खुद को यूं ढालते रहना।।
-यूनुस खान
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